बरवाडीह के पातालकोहड टोला में जल संकट गहराया, दूषित पानी पीने को मजबूर आदिवासी परिवार

- पातालकोहड टोला में दूषित पानी पीने को मजबूर आदिवासी परिवार, जनप्रतिनिधियों से कार्रवाई की मांग
- बरवाडीह के सुदूरवर्ती गांव में जल संकट गहराया, प्रमुख ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
- चुनावी वादों पर उठे सवाल, स्वच्छ पेयजल के लिए ग्रामीणों की आवाज तेज
बरवाडीह। एक ओर विकास, योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर लातेहार जिले के सुदूरवर्ती गांवों की तस्वीर इन दावों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जब आज भी लोग स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता से वंचित होकर दूषित पानी पीने को मजबूर हों, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच की गहरी खाई को दर्शाता है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर योजनाओं की घोषणाएं और विकास के दावे उन लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
प्रमुख ने विभाग और मुख्यमंत्री से की पहल
ऐसा ही एक मामला लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती क्षेत्र लात पंचायत के ग़ासेदाग गांव स्थित पातालकोहड टोला से सामने आया है। यहां निवास करने वाले आदिवासी परिवार वर्षों से गंदा एवं दूषित पानी पीकर जीवनयापन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार स्वच्छ पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वे मजबूरीवश ऐसे जल स्रोतों पर निर्भर हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित नहीं माने जाते। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार समस्या की जानकारी संबंधित स्तर पर दी गई, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आई। मामला संज्ञान में आने के बाद प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों को फोन के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने इस गंभीर समस्या को तत्काल समाधान योग्य बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया। साथ ही मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि क्षेत्र के आदिवासी परिवारों को जल्द राहत मिल सके।
बुनियादी सुविधाओं पर हो प्राथमिक कार्रवाई
इधर सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने कहा कि चुनाव के दौरान गांवों की तस्वीर बदलने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन कई सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और ग्रामीणों को इसके लिए संघर्ष करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। दीपक राज ने कहा कि यदि एक माह के भीतर विभाग द्वारा वहां स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो पीएचईडी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।



