मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने देवघर में न्यूरोसर्जरी और पल्मोनोलॉजी में क्लिनिकल प्रगति को किया रेखांकित

देवघर। पूर्वी भारत में बढ़ते न्यूरोलॉजिकल और श्वसन संबंधी रोगों के बोझ को समझते हुए कोलकाता स्थित मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने एक इंटरैक्टिव मेडिकल अवेयरनेस सत्र का आयोजन देवघर के वियोरे इन में किया गया। इस सत्र का नेतृत्व रेखांकित . सुनंदन बसु, कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी, और डॉ. नंदिनी बिस्वास, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने किया, जिन्होंने बदलते रोग पैटर्न, शुरुआती निदान के महत्व और विशेष उपचार में हालिया प्रगति पर विशेष जानकारी साझा किया।
डॉक्टर द्वय के अनुसार हालिया वैश्विक स्वास्थ्य आकलनों के अनुसार, न्यूरोलॉजिकल और श्वसन संबंधी विकार वैश्विक रोग भार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हर वर्ष विश्वभर में लगभग 15 मिलियन लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं, जबकि 500 मिलियन से अधिक लोग प्रॉनिक श्वसन रोगों से प्रभावित हैं, जिनमें सीओपीडी और अस्थमा के बढ़ते मामले शामिल हैं। भारत में प्रदूषण, बढ़ती आयु वाली आबादी और जीवनशैली में बदलाव जैसे कारकों के कारण ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल विकार, ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी और क्रॉनिक फेफड़ों के रोगों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
सत्र में न्यूरोलॉजिकल स्थितियों जैसे ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल विकार, स्ट्रोक से जुड़ी जटिलताओं और ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी की बढ़ती घटनाओं के साथ-साथ श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी), अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और अन्य पल्मोनरी जटिलताओं की बढ़ती दर पर भी प्रकाश डाला गया।



