धनबाद में जमीन विवाद: रंगदारी, कब्ज़ा और सरकारी तालाब को लेकर बढ़ा तनाव

धनबाद (झारखंड) के बाघमारा प्रखंड अंतर्गत कांड्रा पंचायत स्थित बौरा बांध तालाब (मौजा संख्या 324) को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। एक ओर स्थानीय निवासियों ने जमीन पर जबरन कब्ज़ा, रंगदारी और धमकी देने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने इसे सरकारी तालाब घोषित करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, उक्त भूखंड (पुराना खाता संख्या 154, प्लॉट संख्या 795-796, कुल रकबा लगभग 2.62 एकड़) पर वे लंबे समय से निवास करते हुए मत्स्य पालन और कृषि कार्य कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय, रांची द्वारा 22 सितंबर 2015 को निर्णय भी दिया जा चुका है।
आरोप है कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यक्तियों द्वारा जमीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जा रही है। उनसे जमीन में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा मत्स्य पालन में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की गई। विरोध करने पर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पीड़ितों का यह भी कहना है कि उनके कृषि उपकरणों की लूटपाट की गई और पंचायत भवन में बुलाकर दोबारा दबाव बनाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम से परिवार में भय का माहौल है और उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा तथा सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, कांड्रा पंचायत की मुखिया द्वारा 11 अप्रैल 2026 को दिए गए आवेदन के आधार पर प्रशासन ने बौरा बांध तालाब को सरकारी संपत्ति माना है। अंचल कार्यालय में चल रहे वाद संख्या 4/2025-26 में सुनवाई के बाद इसे सरकारी तालाब घोषित किया गया।
प्रशासन ने तालाब में मौजूद मछलियों को पकड़ने और उससे प्राप्त राशि को सरकारी खाते में जमा करने के लिए एक टीम का गठन किया है। इस टीम में मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और अंचल निरीक्षक को शामिल किया गया है।
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए और प्राप्त धनराशि को सरकारी बैंक खाते में जमा किया जाए।
इस मामले में एक तरफ निजी स्वामित्व का दावा है, तो दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर तालाब को सरकारी बताया जा रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है। फिलहाल प्रशासनिक हस्तक्षेप और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।



