दिव्यांगों के हौसले को मिलेगी नई उड़ान, पटना में होगी “दिव्य दौड़ – गगन छूने की तमन्ना”

एक पहल : दिव्यांगों के लिए “दिव्य दौड़”

पटना। दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास, सशक्तिकरण एवं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 जून को “दिव्य दौड़ – गगन छूने की तमन्ना” का आयोजन किया जाएगा। यह दौड़ प्रातः 7:30 बजे लोक भवन, पटना के मुख्य द्वार से प्रारंभ होकर जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के समीप जाकर संपन्न होगी।

जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के पूर्व निदेशक नरेंद्र पाठक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में दिव्यांगजनों की भागीदारी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज के अभिन्न अंग हैं और भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों के लिए उनका हर संभव सहयोग रहेगा। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

जीवन ज्योति एजुकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रवि रंजन कुमार ने बताया कि “दिव्य दौड़” की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी और यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रत्येक वर्ष बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं आम नागरिक इसमें शामिल होकर समावेशी समाज के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।

बिहार प्रादेशिक अग्रवाल महिला सम्मेलन की अध्यक्ष गीता जैन ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन दिव्यांगजनों के लिए अत्यंत सराहनीय हैं तथा समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। वहीं बी.डी. कॉलेज, पटना की प्राध्यापिका प्रो. नीतू तिवारी ने भी आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

महिला इमदाद कमेटी की पूनम चौधरी ने कहा कि यह दौड़ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के हौसले, संकल्प और सशक्तिकरण का प्रतीक है। दिव्य दृष्टि फाउंडेशन की जयंती झा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से दिव्यांगजनों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिलता है।

चैतन्य राधारमण फाउंडेशन की सुमेधा सहाय ने बताया कि इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को प्रेरित करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

एम.पी. जैन ने बताया कि कार्यक्रम के सफल आयोजन में जीवन ज्योति के सचिव अनिल कुमार सिंह, रिपु जॉन, आशीष, दीपक, नाज़नी, नूर फातिमा, महजबी, नबीला रब्बानी, सदफ जहाँ, अनिल, शिव, रमेश एवं चैतन्य श्रीवास्तव की सक्रिय भूमिका रहेगी।

यह आयोजन दिव्यांगजनों की क्षमता, आत्मबल और समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के साथ-साथ समावेशी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button