डॉ. अम्बेडकर ने अपनी कठिनाइयों को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया : रवि केशरी

देवघर। स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले दो दिवसीय अम्बेडकर जयंती, होटल न्यू ग्रैंड स्थित सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल के भव्य सभागार में आज पिछले दिन आयोजित निबंध लेखन एवं रंगभरो प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, वेक्सो इंडिया के संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, दीनबंधु उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कांति सिकदार, समाजसेवी माधुरी कुमारी सिंह, सुमित्रा देवी व सोनी केशरी के करकमलों से पुरस्कृत किया गया। प्राप्ताँक के आधार पर निबंध प्रतियोगिता में पर्यावरणविद रजत मुखर्जी, हनुमान टिकरी निवासी पूजा पुष्पांजलि, एकलव्य पब्लिक स्कूल की वैष्णवी कुमारी सिन्हा, दीनबंधु उच्च विद्यालय की नव्या कुमारी एवं दिव्या कुमारी का चयन हुआ है जबकि रंगभरो प्रतियोगिता में संत फ्रांसिस स्कूल, देवघर की अनन्या कुमारी सिंह, सिन्हा इंटरनेशनल स्कूल की अंजल चौधरी, एकलव्य पब्लिक स्कूल की वैष्णवी कुमारी सिन्हा, सुप्रभा शिक्षा स्थली के आर्यन केशरी, भारती विद्यापीठ की पूनम कुमारी, दीनबंधु उच्च विद्यालय के सत्यम केशरी, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल की आराध्या कुमारी सिंह, दीनबंधु की दिव्या एवं नव्या तथा श्री श्री मोहनानंद प्लस टू स्कूल, तपोवन की क्षमा कुमारी को पुरस्कृत किया गया।
मौके पर मुख्य अतिथि रवि केशरी ने कहा- डॉ. अम्बेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हमारे पास दृढ़ इच्छाशक्ति और शिक्षा का बल हो, तो हम हर बाधा को पार कर सकते हैं। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर एक समान, न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए। काजल सिकदार ने कहा- भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और हमारे संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ था। वे एक साधारण परिवार में जन्मे, लेकिन उनके विचार और कार्य असाधारण थे। प्रारम्भ में प्रो. रामनंदन सिंह ने कहा- बचपन में अम्बेडकर ने जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता का सामना किया, जिसने उनके मन में समाज को बदलने का संकल्प उत्पन्न किया। केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देव ने कहा- डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से ही समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका प्रसिद्ध नारा “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी हमें प्रेरित करता है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और श्रमिकों के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
माधुरी सिंह ने कहा-अम्बेडकर ने अपनी कठिनाइयों को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
अम्बेडकर जी ने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे अत्यंत विद्वान और दूरदर्शी व्यक्ति थे। उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और दलितों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।
उनका सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान का निर्माण है। वे संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने ऐसा संविधान बनाया जो सभी नागरिकों को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय प्रदान करता है। उनके प्रयासों से ही हमें मौलिक अधिकार मिले, जो हर भारतीय को गरिमा और समानता के साथ जीने का अधिकार देते हैं।



