जैन धर्मावलंबियों ने मनाया चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथजी का जन्म, एवं मोक्ष कल्याण

पटना। जैन धर्मावलंबियों ने पटना के मंदिरों में मनाया जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथजी का जन्म एवं मोक्ष कल्याण। जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि पटना के मीठापुर, श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कदमकुआं, मुरादपुर, कमलदह, कालीबीबी कटरा, गुलजारबाग, गुरारा दिगम्बर जैन मंदिर सहित सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान अभिनंदननाथजी का जन्म एवं मोक्ष कल्याण श्रद्धा एवं भक्ति से मनाया।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कदमकुआं में पाटलिपुत्र दिगम्बर जैन समिति के उपाध्यक्ष निर्मल बड़जात्या भी पूजा अर्चना किया। प्रातः से ही श्रद्धालुगण मंदिरों में पहुंचने लगे। मन्दिर में भगवान का अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद शांतिधारा की गई। फिर भगवान का अर्ध्य चढ़ाया गया। फिर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी के सचिव पराग जैन ने बताया कि जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनंदन्नाथजी का जन्म एवं मोक्ष कल्याणक कमिटी द्वारा संचालित सभी तीर्थ क्षेत्रों पर भी भक्ति एवं श्रद्धा से मनाया गया।
भगवान अभिनंदननाथजी जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ जी हैं। उनका जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के राजा संवर और माता सिद्धार्था के यहां माघ शुक्ल द्वितीय को हुआ था, और उन्होंने वैशाख शुक्ल अष्टमी को सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त किया। उनका चिह्न ‘बंदर’ है और वे आत्म-संयम व स्थिरता के प्रतीक माने जाते हैं। भगवान अभिनन्दननाथ के जीवन का मुख्य संदेश सांसारिक मोह से विरक्ति और आत्म-संयम की ओर प्रवृत्त होना है। उनका चरित्र धैर्य और मानसिक दृढ़ता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।



