वेतन-पेंशन पर निर्णायक लड़ाई! 11 फरवरी से सड़कों पर उतरेंगे कॉलेज शिक्षक-कर्मी
फैक्टनेब ने CM और शिक्षा मंत्री को भेजा अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो विधान सभा घेराव

पटना। बिहार के संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं हुआ तो 11 फरवरी से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
फैक्टनेब ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के आदेश और बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के बावजूद परीक्षाफल आधारित वेतनानुदान व्यवस्था अब तक समाप्त नहीं की गई है। महासंघ ने इसे शिक्षकों के साथ अन्याय बताते हुए नियमित वेतन और पेंशन लागू करने की मांग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

आठ सत्रों का बकाया, शिक्षकों में भारी आक्रोश
महासंघ ने शैक्षणिक सत्र 2015-18 से अब तक आठ सत्रों के बकाया वेतनानुदान का भुगतान जल्द शुरू करने, विभागीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया चालू करने और महंगाई भत्ते के अनुरूप पुनरीक्षित दर पर एकमुश्त भुगतान सीधे बैंक खातों में भेजने की मांग की है।
साथ ही 2008 के संकल्प का अनुपालन करते हुए परीक्षा परिणाम आधारित वेतनानुदान की अधिसीमा (स्नातक हेतु 1.5 करोड़ और इंटर हेतु 50 लाख) समाप्त करने, सभी विश्वविद्यालयों में समयबद्ध सिनेट चुनाव, उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन पारिश्रमिक में कटौती पर रोक तथा 2007 के बाद नियुक्त शिक्षाकर्मियों की सेवा संपुष्टि हेतु चयन समिति गठन की मांग भी उठाई गई है।
विधानसभा मार्च से शुरू होगा शक्ति प्रदर्शन
फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो. राजीव रंजन और मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ने संयुक्त रूप से बताया
11 फरवरी: विधानसभा के समक्ष चेतावनी मार्च और धरना स्थल पर आमसभा
12-13 फरवरी: बिहार विधान मंडल के सामने धरना
आगे के चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा बाद में
नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की “समृद्धि यात्रा” के दौरान भी शिक्षाकर्मी ज्ञापन सौंपेंगे। इसके अलावा सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का घेराव कर दबाव बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय मंच पर भी उठेगी आवाज
फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ. सिन्हा के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक शिक्षक 21-23 फरवरी को मदुरई (तमिलनाडु) में होने वाले अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (AIFUCTO) के 34वें राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेकर बिहार के शिक्षकों की समस्याएं राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे।
सरकार के लिए चेतावनी संकेत
शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कॉलेज शिक्षक यदि सड़क पर उतरते हैं, तो इसका असर सीधे उच्च शिक्षा पर पड़ना तय है। अब नजर सरकार पर है
क्या मांगों पर तुरंत निर्णय होगा?
या बिहार एक बड़े शैक्षिक आंदोलन की ओर बढ़ रहा है?
फिलहाल इतना तय है—इस बार शिक्षक पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।



