महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव के ‘महाकाल’ से ‘शंकर’ बनने की यात्रा का उत्सव है : डॉ. प्रदीप सिंह देव

महाशिवरात्रि 2026
देवघर। महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिव जी के विवाह के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं। मौके पर बैद्यनाथ माहात्म्य के लेखक सह वेक्सो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। 2026 में तिथि और मुहूर्त का विवरण इस प्रकार है : महाशिवरात्रि तिथि- 15 फरवरी 2026, पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त- सुबह 06:30 बजे से 09:30 बजे तक, चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ- 15 फरवरी 2026, शाम 05:04 बजे से, चतुर्दशी तिथि समाप्त- 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे तक।
विशेष योग : इस साल 15 फरवरी को सुबह 07:00 बजे से शाम 07:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग 12 घंटे से अधिक समय तक प्रभावी होगा। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, दान या किसी भी नए काम की शुरुआत जीवन के हर क्षेत्र में अटूट सफलता देती है। डॉ. देव ने कहा- महाशिवरात्रि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रम्हा के रूद्र रूप में मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रम्हांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।
महाशिवरात्रि का दिन भगवान शिव के ‘महाकाल’ से ‘शंकर’ बनने की यात्रा का उत्सव है। लंबे समय तक वैराग्य में रहने के बाद, भगवान शिव ने इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। यह हमें सिखाता है कि प्रेम और समर्पण से स्वयं महादेव को भी पाया जा सकता है।एक बहुत ही सुंदर मान्यता यह भी है कि इसी विशेष दिन भगवान शिव ने पहली बार ‘आनंद नृत्य’ किया था। यह नृत्य ब्रह्मांड के सृजन, संरक्षण और विसर्जन की लय को दर्शाता है। जब शिव आनंदित होते हैं, तो संपूर्ण ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव पहली बार ‘अग्नि स्तंभ’ या ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न तो आदि था और न ही अंत।
ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता के विवाद को शांत करने के लिए शिव का यह स्वरूप प्रकट हुआ था। महाशिवरात्रि पर महादेव को प्रसन्न करना बहुत सरल है, बशर्ते आपकी भक्ति सच्ची हो। इस दिन शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करने की परंपरा है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से कुछ बातें और भी महत्वपूर्ण हैं : शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, शहद और दही अर्पित करें, ‘त्रिदलं त्रिगुणाकारं’ – तीन पत्तियों वाला बेलपत्र महादेव को अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप कट जाते हैं, महादेव को वह चीजें प्रिय हैं जो संसार त्याग देता है। धतूरा और आक के फूल उनके वैरागी स्वरूप को समर्पित किए जाते हैं, मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप न केवल मन को शांत करता है बल्कि आपके आसपास एक सुरक्षा कवच भी बनाता है।



