पीठ थप थपाना बन्द कर शिक्षाकर्मियों की समस्याओं का समाधान करे सरकार : फैक्टनेब

पटना। बिहार सरकार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शैक्षणिक सत्र, परीक्षा संचालन और परीक्षा परिणाम को लेकर अपनी पीठ खुद थपथपाने पर बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर परीक्षा संचालन और परीक्षा परिणाम घोषित किया जाना स्वागत योग्य है, परन्तु इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की कोई महत्वपूर्ण योगदान या प्रयास नहीं है, बल्कि शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण यह सुनिश्चित हुआ है।
फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो राजीव रंजन एवं मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि राज्य के तकरीबन 60 से 70 प्रतिशत शिक्षार्थी अनुदानित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं और उन्हीं के बदौलत बिहार की शिक्षा व्यवस्था चल रही है, अन्यथा शिक्षा विभाग, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद करने को संकल्पित दिखाई दे रहे हैं।
फैक्टनेब नेताओं ने बिहार सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन एवं विद्यालय परीक्षा समिति के अधिकारियों को सलाह दिया है कि अपनी पीठ अपने थपथपाने की कला कौशल को बिहार की शिक्षा व्यवस्था सुधारने में लगायें। फैक्टनेब नेताओं ने मांग किया है कि राज्य के सभी कोटि के शिक्षण संस्थानों के सभी समस्याओं का निदान अतिशीघ्र किया जाये, अनुदानित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान राशि के बदले प्रतिमाह वेतन – पेंशन का भुगतान किया जाये तथा परीक्षा परिणाम आधारित बकाया अनुदान राशि का भुगतान बंधेजों को समाप्त करते हुए एकमुश्त किया जाये।



