मातृ दिवस पर प्रतियोगिता विजेताओं को 10 मई को मिलेगा सम्मान
मातृत्व, त्याग और अटूट प्रेम का उत्सव है अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस : डॉ. प्रदीप सिंह देव

देवघर। “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” – अर्थात् जननी और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊपर है। संसार में ‘माँ’ वह शब्द है जिसमें पूरी सृष्टि का सार समाया हुआ है। एक बच्चा जब अपनी आँखें खोलता है, तो वह सबसे पहले अपनी माँ को देखता है। माँ न केवल जीवन देती है, बल्कि वह बच्चे की प्रथम गुरु, रक्षक और मार्गदर्शक भी होती है। इसी निस्वार्थ प्रेम और त्याग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस’ मनाया जाता है। पिछले दिन स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के बैनर तले साप्ताहिक अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस के उपलक्ष में विद्यार्थियों के बीच रंगभरो एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था।
जिसके विजयी प्रतिभागियों को 10 मई को होटल न्यू ग्रैंड स्थित सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल के भव्य सभागार में डिपसर के उप- प्राचार्या प्रो. (डॉ.) बबिता कुमारी, फूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट के व्याख्याता डॉ. श्वेता लिंगवाल, मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका शोभना सिंह, संत माइकल एंग्लो विद्यालय की निदेशक डॉ. जय चंद्र राज, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, वेक्सो इंडिया के संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव एवं अन्य के करकमलों से पुरस्कृत किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवसंघ नेशनल स्कूल के स्वस्तिक रोहन, दुमका की गृहिणी पूनम कुमारी एवं किंडर रोज प्ले स्कूल की पीहू प्रिशा, सुप्रभा शिक्षा स्थली के आर्यन केशरी, गृहिणी रिम्पी कुमारी, देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की वन्या एवं अनन्या कुमारी सिंह, स्वस्तिक बणिक, दीनबंधु उच्च विद्यालय की दिव्या कुमारी एवं नव्या कुमारी, एकलव्य पब्लिक स्कूल की वैष्णवी कुमारी सिन्हा, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल के आरव कुमार सिंह एवं अन्य के नाम विजेता सूची में शामिल है।
मौके पर डॉ. प्रदीप ने कहा-मातृ दिवस मनाने की शुरुआत आधुनिक काल में अमेरिका से हुई थी। इसकी प्रेरणा ‘एना जार्विस’ नामक महिला ने दी थी। एना अपनी माँ से बहुत प्यार करती थी और उनकी मृत्यु के बाद वह चाहती थी कि समाज में माताओं को वह सम्मान मिले जिसकी वे हकदार हैं। 1908 में उन्होंने अपनी माँ की याद में एक स्मारक सभा आयोजित की और औपचारिक रूप से इस दिन को मनाने का अभियान चलाया। अंततः, 1914 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को आधिकारिक तौर पर ‘मदर्स डे’ घोषित किया। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरी दुनिया में फैल गई। एक स्त्री जब माँ बनती है, तो वह अपने अस्तित्व को अपने बच्चे के साथ जोड़ लेती है। माँ के त्याग की गणना शब्दों में करना असंभव है। नौ महीने तक गर्भ में पालने से लेकर, बच्चे के पालन-पोषण, उसकी शिक्षा और उसे एक अच्छा इंसान बनाने तक, माँ हर कदम पर अपनी खुशियों का बलिदान देती है। वह स्वयं भूखी रहकर बच्चे का पेट भरती है और अपनी रातों की नींद त्यागकर बच्चे को सुकून की नींद सुलाती है।
माँ का प्रेम दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रेम है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं होता। माँ किसी भी परिवार की धुरी होती है। वह घर को केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि खुशियों का मंदिर बनाती है। एक माँ अपने बच्चों को संस्कार देती है, उन्हें सही और गलत का अंतर समझाती है और समाज के लिए एक उत्तरदायी नागरिक तैयार करती है। नेपोलियन बोनापार्ट ने एक बार कहा था, “मुझे अच्छी माताएं दो, मैं तुम्हें एक महान राष्ट्र दूंगा।” यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि समाज के निर्माण में एक माँ का योगदान कितना महत्वपूर्ण है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ लोग अपने काम और करियर में इतने व्यस्त हो गए हैं कि परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है, वहाँ मातृ दिवस जैसे दिन हमें ठहरने और सोचने का अवसर देते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि : हमें अपनी माँ के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए, हमें उनके द्वारा किए गए संघर्षों को पहचानना चाहिए।
यह दिन बच्चों और माँ के बीच के भावनात्मक बंधन को और मजबूत करता है। यद्यपि माँ के प्रति सम्मान जताने के लिए किसी एक विशेष दिन की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इस दिन को खास बनाकर हम उन्हें खुशी दे सकते हैं। माँ के लिए सबसे बड़ा उपहार आपका समय है। उनके साथ बैठें, उनकी बातें सुनें और पुरानी यादें ताज़ा करें। हम उन्हें उनकी पसंद की कोई चीज़ भेंट कर सकते हैं या हाथ से बना हुआ एक छोटा सा कार्ड दे सकते हैं। इस दिन कोशिश करें कि माँ को घर के कामों से छुट्टी मिले और आप स्वयं उनके लिए कुछ खास पकाएं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें महसूस कराएं कि वे आपके जीवन में कितनी अनमोल हैं। आज के समय में मातृ दिवस का व्यवसायीकरण भी बढ़ गया है, जहाँ लोग केवल सोशल मीडिया पर फोटो डालकर अपना कर्तव्य पूरा समझ लेते हैं। लेकिन वास्तविक सम्मान वह है जो हम हर दिन उनके प्रति अपने व्यवहार में दिखाते हैं।
जैसे-जैसे माता-पिता वृद्ध होते हैं, उन्हें अपने बच्चों के साथ और सहारे की अधिक आवश्यकता होती है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस माँ ने हमारे बचपन को संवारा, उसका बुढ़ापा अकेलापन और उपेक्षा में न बीते। मातृ दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक अहसास है। माँ ईश्वर का वह रूप है जो हमारे साथ साक्षात मौजूद है। उनके चरणों में स्वर्ग माना गया है। अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस हमें यह संदेश देता है कि दुनिया में चाहे कितनी भी तकनीक और सुख-सुविधाएं आ जाएं, लेकिन माँ की गोद जैसा सुकून और उनके आंचल जैसी छांव कहीं और नहीं मिल सकती। आइए, इस मातृ दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम अपनी माँ का सदैव सम्मान करेंगे, उनकी आज्ञा का पालन करेंगे और उनके चेहरे पर कभी उदासी नहीं आने देंगे। माँ को समर्पित कुछ पंक्तियाँ:
“घुटनों से रेंगते-रेंगते, जब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छांव में, जाने कब मैं बड़ा हुआ!”



