65 वर्ष तक स्थायीकरण की मांग लेकर मुख्यमंत्री से मिले असिस्टेंट गेस्ट प्रोफेसर
मुख्यमंत्री का आश्वासन, ललन सर्राफ से कहा पटना में याद दिलाकर कराएं काम

मधेपुरा। राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत असिस्टेंट गेस्ट प्रोफेसरों की समस्याओं को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मधेपुरा में मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। जदयू जिला के मुख्य प्रवक्ता सह बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय गेस्ट प्रोफेसर संघ के संयोजक डॉ. राजीव जोशी के नेतृत्व में दर्जनों गेस्ट प्रोफेसरों ने मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने गेस्ट प्रोफेसरों को 65 वर्ष तक स्थायी करने, राज्य के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में रिक्त शिक्षक पदों पर उन्हें अवसर देने, बहाली नियमावली में प्राथमिकता देने तथा समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी।
इस अवसर पर डॉ. राजीव जोशी ने मुख्यमंत्री से कहा कि गेस्ट प्रोफेसर पिछले सात वर्षों से लगातार महाविद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कई गेस्ट प्रोफेसरों ने अन्य नौकरियों को छोड़कर शिक्षण सेवा को चुना है और अब उनकी आयु भी 55 वर्ष पार कर चुकी है, ऐसे में सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि गेस्ट प्रोफेसरों से जुड़े मुद्दों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विधान परिषद की समिति ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है, जिस पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान विधान परिषद में जदयू के नेता ललन सर्राफ की ओर इशारा करते हुए कहा कि पटना में इस मामले को याद दिलाकर इन लोगों का कार्य आगे बढ़ाया जाए।
इस मौके पर जदयू नेता अशोक चौधरी, विधायक डॉ. रमेश ऋषि, जदयू जिला अध्यक्ष मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी, अक्षय झा, अमर यादव, मोहम्मद बाबुल, डॉ. सिकंदर, डॉ. अनुजा, डॉ. कविता, श्वेता शरण, प्रणव झा, डॉ. लक्ष्मण, डॉ. बिट्टू, डॉ. मनोज भटनागर, डॉ. रहमान सहित बड़ी संख्या में गेस्ट प्रोफेसर मौजूद थे।



