विश्व हीमोफिलिया दिवस 2026 का थीम- निदान : देखभाल की पहली सीढ़ी : डॉ. प्रदीप सिंह देव

देवघर। विश्व हीमोफिलिया दिवस प्रत्येक वर्ष 17 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हीमोफिलिया तथा अन्य रक्तस्राव से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाना, सही उपचार उपलब्ध कराना और मरीजों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। यह दिवस पहली बार 1989 में मनाया गया था और इसे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया द्वारा शुरू किया गया था। मौके पर स्थानीय साइंस एंड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- विश्व हीमोफिलिया दिवस 2026 का थीम- निदान : देखभाल की पहली सीढ़ी है। यह थीम इस बात पर जोर देता है कि किसी भी बीमारी के उपचार की शुरुआत सही और समय पर निदान से होती है। विश्व स्तर पर बड़ी संख्या में लोग हीमोफिलिया से पीड़ित हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश का सही समय पर निदान नहीं हो पाता। हीमोफिलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर में खून जमाने वाले तत्व की कमी होती है। इसके कारण व्यक्ति को छोटी चोट लगने पर भी लंबे समय तक रक्तस्राव हो सकता है। इसका दो मुख्य प्रकार : हीमोफिलिया ए- फैक्टर 8 की कमी एवं हीमोफिलिया बी- फैक्टर 9 की कमी।
इस दिवस का चयन 17 अप्रैल को इसलिए किया गया क्योंकि यह फ्रैंक सचनाबेल का जन्मदिन है, जो वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के संस्थापक थे। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है : लोगों को बीमारी के बारे में जागरूक करना, मरीजों को सही इलाज उपलब्ध कराना, सरकार और समाज को इस दिशा में सक्रिय करना। 2026 थीम का निदान : देखभाल की पहली सीढ़ी, अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि : दुनिया में लगभग 75% से अधिक मरीजों का निदान नहीं हो पाता। बिना निदान के मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाता। कई बार महिलाएं और बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होते हुए भी पहचान में नहीं आते। विकासशील देशों में जांच सुविधाओं की कमी है। यह थीम स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, लैब सुविधाओं को बढ़ाने और डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने पर बल देता है। हीमोफिलिया के लक्षण- लंबे समय तक खून बहना, जोड़ों में दर्द और सूजन, बिना कारण खून बहना, चोट लगने पर अत्यधिक रक्तस्राव, नाक से बार-बार खून आना। हालांकि हीमोफिलिया पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है : क्लॉटिंग फैक्टर थेरेपी, नियमित चिकित्सा जांच, फिजियोथेरेपी, चोट से बचाव, जागरूकता और समय पर इलाज।
विश्व भर में इस दिन कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं : जागरूकता रैली और सेमिनार, सोशल मीडिया अभियान अस्पतालों में मुफ्त जांच शिविर, लाल रंग से समर्थन दिखाना, मरीजों और परिवारों के लिए सहायता कार्यक्रम करना। भारत जैसे देश में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि : ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है, निदान सुविधाएं सीमित हैं, इलाज महंगा होता है, सामाजिक समर्थन कम है … इसलिए सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा इस दिन विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस वर्ष का थीम हमें यह सिखाता है कि किसी भी बीमारी से लड़ने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है—सही समय पर पहचान। जब तक रोग का सही निदान नहीं होगा, तब तक प्रभावी उपचार संभव नहीं है। यह दिवस समाज, सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं को मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करता है ताकि हर व्यक्ति को समय पर जांच, उपचार और बेहतर जीवन मिल सके।



