परासन में अवैध खनन का विरोध करने पर किसान को बंदूक की दम पर धमकाने का आरोप

उरई (जालौन)। जनपद के परासन गांव में अवैध खनन और किसानों की फसलें उजाड़ने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने खंड संचालकों के ठेकेदारों पर भारी मशीनों से खेतों में लगी सब्जियों और फसलों को नुकसान पहुंचाने, विरोध करने पर किसानों को धमकाने तथा पुलिस के माध्यम से झूठे मामलों में फंसाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की जांच कराने और न्याय दिलाने की मांग की है।
जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में प्रार्थीगण ने बताया कि वे ग्राम अलमौरी डेरा परासन के मूल निवासी हैं। उनके परिवार नदी किनारे अपनी सब्जी की बारी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परासन खंड संख्या 4032/15 के खंड संचालक मेसर्स सलोनी इंटरप्राइजेज की ओर से बीते कई दिनों से भारी मशीनों के जरिए उनकी सब्जियों और फसलों को अवैध तरीके से उजाड़ा जा रहा है। इससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब किसान इसका विरोध करते हैं तो उन्हें पुलिस के माध्यम से झूठे मामलों में पकड़वाने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में खड़ी फसलें उजाड़े जाने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। आरोप है कि निर्धारित सीमांकन से बाहर भी खनन किया जा रहा है, जिससे आसपास के किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं।
शिकायती पत्र में 26 अक्टूबर 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि किसान कठोरा पुत्र शिवराम अपनी बारी में काम कर रहा था। इसी दौरान खंड संचालकों की ओर से तैनात शेर सिंह पुत्र अमर सिंह ने कथित तौर पर कठोरा के सीने पर बंदूक लगाकर उसे धमकाया। आरोप है कि उसे वहां से चले जाने और दोबारा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस पर भी खनन करने वालों की मदद करने का आरोप लगाया है।
पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने, फसलों को हुए नुकसान की भरपाई कराने तथा आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने शिकायती पत्र के साथ वीडियो और फोटो भी संलग्न किए हैं।ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से सत्यप्रकाश निषाद, गोविंद नारायण, रामहेत, प्रमोद, दशाराम, गयाप्रसाद, महादेव, प्रकाश, धर्मेंद्र, हरीकिशन, कढोरे, शिवनारायण, रामकुमार आदि किसान मौजूद रहे।



