महिला सुरक्षा और संरक्षा महत्वपूर्ण : सुनीता

पटना। विश्व युवक केंद्र दिल्ली एवं प्रेम यूथ फाउंडेशन की ओर से महिला सुरक्षा एवं संरक्षा के विषय पर सेमिनार का आयोजन महादेव हाई स्कूल के सभागार पटना में किया गया । फाउंडेशन के संस्थापक गांधीवादी प्रेम जी ने बताया कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कर रही है । जमीन से लेकर आसमान में ही नही अंतरिक्ष मे भी उनके कदमो की छाप मौजूद है । जिस तरह से उनका कद बढ़ा है,तो अब वे अपने हक और उससे जुड़े कानूनों के बारे भी जानना चाहती है । आइए जाने घर से लेकर दफ्तर तक एक महिला के क्या अधिकार होते है । महिलाओं के प्रति हम सबकी सोच और नजरिये में पिछले कुछ दशकों में गजब का सकारात्मक बदलाव आया है पर इन बदलबो का मतलब यह नही है कि पुरुष और महिलाएं बराबरी पर पहुँच गये है। समानता की यह लड़ाई अभी काफी लंबी चलनी है । दुनिया के कई देशों में आज भी महिलाएं अपनी हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही है।
इन मे अपना देश भी शामिल है। इससे बड़ा दुख तो यह है कि आज भी अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों और हक के बारे में सही तरीके से जानती तक नही है , जबकि होना तो यह चाहिए कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी रहनी चाहिए । आइए जाने की भारतीय संविधान भारत के महिलाओं को क्या क्या अधिकार देता है। गोपनीयता का अधिकार – आपराधिक प्रकिया संहिता की धारा 164 की तहत बलात्कार की शिकार महिला जिला मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करबा सकती है और जब मामले की सुनवाई चल रही हो तो वहां किसी और व्यक्ति को उपस्थित होनी की आवश्यकता नही है वैकल्पिक रूप से वह एक ऐसे सुविधा जनक स्थाम पर केवल एक पुलिस अधिकारी और महिला सिपाही के साथ बयान तिकार्ड कर सकती है ,जो भीड़ भड़ा नही हो और जहां किसी चौथे व्यक्ति के बयान को सुनने की आशंका न हो ।
पुलिस अधिकारियों के लिए एक महिला की निजता को बनाए रखना जरूरी है यह भी जरूरी है कि पीड़िता का नाम और पहचान सार्वजनिक न होने पाए । अमूमन भारत मे जब भी महिला अकेले पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराने जाती है तो उसके बयान को तोड़ मंडोर कर लिखे जाने का खतरा रहता है । कई ऐसे मामले भी देखने को मिले है जिनमे उसे अपमान झेलना पड़ा और शिकायत को दर्ज करने से मना कर दिया । एक महिला होने के नाते आपको यह पता होना ही चाहिए कि आपको भी कानूनी मदद लेने की पूर्ण अधिकार है और आप इसकी मांग कर सकती है । यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आपको मुफ्त मे कानूनी सहायता मुहैया कराए । देर से भी धिकायत दर्ज कराने का अधिकार बलात्कार या छेड़छाड़ की घटना के काफी समय बीत जाने के बाबजूद पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इनकार नही कर सकती है । बलात्कार किसी भी महिला के लिए एक भयावह घटना है , इसलिए उसका सदमे में जाना और तुरंत इसकी रिपोर्ट नही लिखबाना एक स्वभाविक प्रक्रिया है ।
वह अपनी सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए डर सकती है इन बातों को ध्यान में रखते हुये सर्वोच न्यायालय ने फैसला दिया है कि बलात्कार या छेड़छाड़ की घटना होने और शिकायत दर्ज करने के बीच काफी वक्त बीत जाने के बाद भी एक महिला अपने खिलाफ यौन अपराध की मामला दर्ज करा सकती है ।
सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार – अधिक से अधिक महिलाओं के सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु यह सबसे अधिक उपयोगी कानूनों में से एक है । प्रत्येक कार्यालय में एक यौन उत्पीड़न शिकायत समिति बनाना नियोक्ता का कर्तव्य है । सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी एक दिशा निर्देश के अनुसार यह भी जरूरी है कि समिति का नेतृत्व एक महिला करें और सदस्यों की तौर पर उसमें पचास प्रतिशत महिलाएं शामिल हो । साथ ही,समिति के सदस्यों में से एक महिला कल्याण समूह से भी हो । इससे कोई फर्क नही पड़ता कि आप एक स्थायी कर्मचारी है या नही ।
यहाँ तक कि एक इंटर्न , पार्ट टाइम कर्मचारी , कार्यालय में आने बाली कोई भी महिला या कार्यलय में साक्षात्कार के लिए गयी महिला का भी उत्पीड़न किया गया है तो वह भी इस समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करबा सकती है । कार्यालय में उत्पीड़न की शिकार महिला धटना के तीन महीने के भीतर इस समिति को लिखित शिकायत दे सकती है । यदि आपके कम्पनी में दस या अधिक कर्मचारी है और उनमें से केवल एक महिला है तो भी आपके कम्पनी के लिए इस समिति का गठन करना आवश्यक है । हालांकि ऐसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति में ,जहाँ यह समिति मौजूद नही है या आपको लगता है कि समिति आपकी बचाव नही करेगी तो आप सीधे जिला स्तर पर मौजूद स्थानीय शिकायत समिति से सम्पर्क कर सकती है जरूरी नही की यह शिकायत आप ही करें । आपकी ओर से कोई दूसरा व्यक्ति भी यह शिकायत कर सकता है ।
जीरो एफआईआर का अधिकार- एक महिला को इमेल या पंजिकृत डाक के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने का विशेष अधिकार है । यदि किसी कारण बस वह पुलिस स्टेशन नही जा सकती है तो वह एक पंजीकृत डाक से लिखित शिकायत भेज सकती है जो पुलिस उपायुक्त या पुलिस आयुक्त के स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को संबोधित की गयी हो । इसके अलाबा,एक बलात्कार पीड़िता जीरो एफआईआर के तहत किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है । कोई भी थाना इस बहाने से एफआईआर दर्ज करने से इंकार नही कर सकता है कि वह क्षेत्र उनके दायरे मे नही आता है ।
घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार- शादी नही टूटनी चाहिए, यह विचार भारतीय महिलाओं के जेहन में इतना जड़ जमा चुका है कि वे अक्सर बिना आवाज उठाये घरेलू हिंसा झेलती रहती है । दहेज सम्वन्धित हत्या की निंदा करती है । इसके अलावा दहेज अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 में ना केवल दहेज देने और लेने , बल्कि दहेज मांगने के लिए भी दंड का प्रावधान है । इस धारा के तहत एक बार इस पर दर्ज की गई एफआईआर इसे गैर जमानती अपराध बना देती है । शारीरिक , मौखिक, आर्थिक यौन समन्वधित या अन्य किसी प्रकार के दुर्व्यवहार धारा 498 – 1 के तहत आता है । घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 भी महिलाओं को उचित स्वस्थ्य देख भाल, कानूनी मदद, परामर्श और आश्रय गृह सम्वन्धित मामलों में मदद करता है ।
इंटरनेट पर सुरक्षा का अधिकार- आपकी सहमति के बिना आपकी तस्वीर या विडिओ , इंटरनेट पर अपलोड करना अपराध है । किसी भी माध्यम से इंटरनेट या वाट्सप पर साझा की गयी आपत्तिजनक या खराब तस्वीरे या विडियोज किसी भी महिला के लिए बुरे सपनो से कम नही है । आपको उस वेवसाइट से सीधे संपर्क करने की जरूरत है ,जिसने आपकी तस्वीर या विडिओ को प्रकाशित किया है । ये वेवसाइट कानून के अधीन है और इनका अनुपालन करने की लिए बाध्य है । आप न्यायालय से एक इंजेक्शन आदेश प्राप्त करने का विकल्प भी चुन सकती है ताकि आगे आपकी तस्वीरों और विडिओ को प्रकाशित न किया जाए । किसी महिला की निजी तस्वीर को बिना अनुमति के खींचना या साझा करना अपराध माना जाता है ।
सामान वेतन का अधिकार- श्रम कानून अधिनियम 1976 सामान कार्य के लिए पुरूष और महिला को सामान भुगतान का प्रावधान करता है । यह भर्ती व सेबा शर्तो में महिलाओं के खिलाफ लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकता है । कन्याभूर्ण हत्या के खिलाफ अधिकार – मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनसी एक्ट , 1971 मानवीयता और चिकित्सा के आधार पर पंजीकृत चिकित्सको को गर्भपात का अधिकार प्रदान करता है । लिंग चयन प्रतिवंध अधिनियम, 1994 गर्भ धारण से पहले या उसके बाद लिंग चयन पर प्रतिबंध लगाता है । यही कानून कन्या भूर्ण हत्या को रोकने के लिए प्रसव से पहले लिंग निर्धारण से जुड़े टेस्ट पर भी प्रतिबंध लगाता है । भूर्ण हत्या को रोकने में यह कानून उपयोगी है ।
प्रेम यूथ फाउंडेशन एवं विधि विमर्श की ओर से सुवे के सभी स्कूल एवं कॉलेज में महिला सुरक्षा एवं संरक्षण के विषय पर सेमिनार पर आयोजित कर रहा है । मौके पर शिक्षिका संगीत कुमार, एएसआई सुनीता कुमारी, देवानंद कुमार, ,अजय राज, सन्नी कुमार सुनील कुमार , सोनू पटेल,अमृत राज, एनके सिंह उर्फ लल्लु, अनवरा अली ,रवि प्रकाश मौजूद रहे ।



