दिनकर शोध पीठ द्वारा तमिल के भाषा विशेषज्ञ और विद्वान डॉ. एम. गोविंदराजन का देवघर में सम्मान
दिनकर की कृति संस्कृति के चार अध्याय का होगा तमिल में अनुवाद

देवघर। दिनकर शोध पीठ, देवघर के तत्वावधान में कल 12 अप्रैल को देर शाम पुनसिया, देवघर स्थित साहित्य तीर्थ परिसर के प्रेमाश्रम में दक्षिण भारत के तमिल हिन्दी भाषा एवं साहित्य के सेतु डॉ. एम. गोविन्दराजन जी का स्वागत सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर देवघर के कई कवि, साहित्यकारों और गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विदित हो कि पिछले जनवरी 2025 में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी के सम्पूर्ण साहित्य का पुनरावलोकन करने, राष्ट्रीय स्तर पर विविध कोर्स के पाठयक्रमों में शामिल कराने, उनके व्यक्तित्व और कृतित्वों पर शोध की सुविधा उपलब्ध कराने और उनकी कृतियों को पूरे राष्ट्र में फैलाने के उद्देश्य से शांतिनिकेतन के डॉ. सुभाष चंद्र राय, दिनकर स्मृति न्यास, दिल्ली के अध्यक्ष नीरज कुमार, बीएचयू के बाला लखेंद्र, नेतरहाट के पूर्व अध्यापक डॉ. मिथिलेश सिंह, देवघर के आलोक मल्लिक ने प्रारंभिक बैठक कर दिनकर शोध पीठ के गठन का निर्णय लिया था।
उस महती संकल्प का यह प्रथम वैचारिकी सत्र था जिसमें तमिल और हिंदी के भाषा विद्वान डॉ. गोविंदराजन जी का विशेष सम्मान किया गया। साथ ही दिनकर शोध पीठ के द्वारा दिनकर की अमर कृति संस्कृति के चार अध्याय का तमिल में अनुवाद का निर्णय लिया गया। डॉ. गोविंदराजन जी ने शोध पीठ के आग्रह को स्वीकार करते हुए बाबा बैद्यनाथ की नगरी में ही रहकर इस कार्य को पूरा करने का वचन दिया। उन्होंने इस वैचारिक सत्र के मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में बहुत ही सुलभ तरीके से भाषा अनुवाद की बारीकियों को रखते हुए संस्कृति के चार अध्याय के तमिल में अनुवाद का शुभारंभ भी आज ही कर देने की बात कही।
जानकारी हो कि डॉ गोविंदराजन जी ने तमिलनाडु में विद्यार्थी जीवन में हिंदी विरोध की गतिविधियों में रहकर कालांतर में तमिल और हिंदी भाषा के सेतु के रूप में खुद को स्थापित किया। 2002 में तमिलनाडु में हिन्दी शिक्षण से सेवानिवृत्ति के पश्चात वे उत्तर भारत के प्रयाग में भाषा संगम जैसे संस्थान से जुड़कर हिंदी की सेवा जारी रखी और तुलसी के रामचरितमानस सहित अनेक ग्रंथों और पाठ्यक्रमों को तमिल में अनुवाद किया। उन्होंने हिंदी भाषियों को तमिल और तमिल भाषियों को हिन्दी सरल तरीके से सीखने के लिए कई किताबें लिखी। भारत सरकार ने उन्हें हिन्दी तमिल भाषा और अनुवाद विशेषज्ञ के रूप में भी कई सेवाएं ली है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी काशी तमिल संगम कार्यक्रम के संयोजन में भी उनकी महती और अग्रणी भूमिका है। देवघर पुस्तक मेला ने भी जब पहली बार भाषा सेतु सम्मान शुरू किया तो सबसे पहले भाषा सेतु सम्मान से उन्हें ही नवाजा।
संगीत मर्मज्ञ और कवि सर्वेश्वर दत्त द्वारी जी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। डॉ. सुभाष चंद्र राय ने कार्यक्रम संयोजन एवं संचालन अपने विशिष्ट अंदाज में किया। डॉ मिथिलेश कुमार, डॉ शंकर मोहन झा, अनिल कुमार झा, चितरंजन रेल कारखान के मुख्य विद्युत अभियंता दिनेश साह, रंजू साह, आलोक कुमार मल्लिक, उमाशंकर राव उरेंदु, रवि शंकर साह, श्री ठाकुर, मनोज कुमार सिंह, अरुण कुमार, राजेश कुमार रंजन, निताई चरण सतपथी कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सज्जनों ने इस अवसर पर अपने विचार रखे और कवियों ने अपनी कविताओं से कार्यक्रम को संजोया। शांतिनिकेतन के रिसर्च स्कॉलर आदित्य और अमन की कार्यक्रम में विशेष सहभागिता रही।



