शिक्षा स्वयंसेवकों और टोला सेवकों को शिक्षा मित्रों की तरह दर्जा दिलाने की सिफारिश का वादा

पटना। ऑल इंडिया तंजीम-ए-इंसाफ, बिहार के उप महासचिव गुलाम सरवर आजाद ने अल्पसंख्यक कल्याण समिति (बिहार विधान सभा) के अध्यक्ष जनाब अख्तरुल इमान से उनके बेली रोड स्थित सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने बिहार के 30 हजार शिक्षा केंद्रों और टोला सेवकों की दयनीय स्थिति पर आधारित 24 पन्नों का एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन पेश करते हुए श्री आजाद ने कहा कि एक तरफ जहाँ नीतीश सरकार बिहार को पूर्ण साक्षर बनाने का प्रयास कर रही है वहीं शिक्षा विभाग के कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले अधिकारी मुख्यमंत्री के इस सपने को चकनाचूर करने की साजिश कर रहे हैं।
आजाद ने पटना के महेंद्रू और गुलज़ारबाग अंचलों के आधा दर्जन स्कूलों की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए अध्यक्ष को अवगत कराया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप-आउट (स्कूल छोड़ने) की दर तेजी से बढ़ रही है। यदि इसे तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया तो साक्षरता दर शून्य तक पहुँचने का अंदेशा है। अध्यक्ष जनाब अख्तरुल इमान ने उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ‘स्थान परिवर्तन’ के नाम पर हटाए गए शिक्षा स्वयंसेवकों को उनके पुराने केंद्रों पर वापस तैनात कराने के प्रयास के साथ साथ शिक्षा सेवकों और टोला सेवकों को शिक्षा मित्रों की तरह विशेष प्रशिक्षण दिलाकर ‘शिक्षक’ का दर्जा देने की सिफारिश बिहार सरकार से की जाएगी एवं ‘मार्गदर्शिका 2018’ के उन बिंदुओं को जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं बदलवाने या आवश्यकता पड़ने पर पूरी मार्गदर्शिका को ही संशोधित करवाने का प्रयास किया जाएगा।



