मुर्शिद आलम की पहल लाई रंग: बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में अब होगी उर्दू और मैथिली की पढ़ाई, राज्यपाल का बड़ा निर्देश

सीमांचल की आवाज पर राजभवन का बड़ा फैसला: उर्दू-मैथिली के छात्रों के लिए खुशखबरी!

जोकीहाट/पटना। बिहार के नवसृजित 211 सरकारी डिग्री महाविद्यालयों में उर्दू शिक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग को बड़ी सफलता मिली है। राज्यपाल सह कुलाधिपति सय्यद अता हसनैन ने आगामी शैक्षणिक सत्र से इन महाविद्यालयों में उर्दू एवं मैथिली विषय की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल के इस फैसले का जोकीहाट विधायक मो. मुर्शिद आलम ने स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया है।

विधायक मुर्शिद आलम ने कहा कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी तथा राजभवन को आवेदन देकर आग्रह किया था कि राज्य के नवसृजित डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि सीमांचल समेत बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण है।

पहली जुलाई से शुरू होगा नया सत्र

जानकारी के अनुसार विभिन्न प्रखंडों में स्थापित 211 सरकारी डिग्री महाविद्यालयों में पहली जुलाई से शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। प्रारंभिक योजना के तहत इन कॉलेजों में छह विषयों—हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र—की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि अब राज्यपाल के निर्देश के बाद उर्दू और मैथिली को भी अध्ययन-अध्यापन के विषयों में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही इन महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले विषयों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी।

भाषाई विविधता को मिलेगा बढ़ावा

शिक्षाविदों का मानना है कि उर्दू और मैथिली विषयों को शामिल किए जाने से छात्रों को अपनी मातृभाषा एवं क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा। विशेष रूप से सीमांचल, मिथिलांचल और उर्दू भाषी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

शिक्षा के साथ भाषा का सम्मान भी जरूरी

विधायक मुर्शिद आलम ने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश की साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा लिया गया यह निर्णय शिक्षा के साथ-साथ भाषाई सम्मान और समावेशी विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू और मैथिली विषयों की पढ़ाई शुरू होने से हजारों विद्यार्थियों को अपने पसंदीदा विषय में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा और बिहार की बहुभाषी शैक्षणिक परंपरा को नई मजबूती मिलेगी।

सीमांचल से उठी आवाज आखिर राजभवन तक पहुंची। 211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में उर्दू और मैथिली को शामिल करने का निर्णय न सिर्फ भाषाई पहचान को सम्मान देगा, बल्कि हजारों छात्रों के सपनों को भी नई उड़ान देगा।

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