श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कदमकुआं में जैन धर्मावलंबियों 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का किया शांति धारा एवं पूजन

पटना। जैन धर्मावलंबियों ने पटना के श्रीपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कदमकुआं में जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का किया शांति धारा एवं पूजन। जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की शांतिधारा एवं पूजन के लिए प्रातः से ही श्रद्धालुगण मंदिर पहुंचने लगे। इसके बाद भगवान वासुपूज्य का अभिषेक निर्मलजी बड़जात्या, अशोक छाबड़ा नयाटोला, एडवोकेट अजीत जैन, प्रभात, विनय, सुनील, मनोज, संजय छाबड़ा, संदीपजी, नवीन जैन सहित अन्य द्वारा किया गया। अभिषेक के बाद शांतिधारा एम पी जैन द्वारा की गई। फिर भगवान का अर्ध्य चढ़ाया गया। फिर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसके बाद अशोक जैन छाबड़ा द्वारा स्वाध्याय सभी श्रद्धालुओं को सुनाया गया।
कौन हैं भगवान वासुपूज्य
अखिल भारतीय दिगम्बर जैन महासमिति के बिहार – झारखंड के महामंत्री एम पी जैन ने बताया कि भगवान वासुपूज्य जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर हैं। जैन मान्यताओं के अनुसार उन्होंने सभी कर्मों का नाश करके सिद्ध पद प्राप्त किया, अर्थात वे एक मुक्त आत्मा बन गए। उनका जन्म चंपापुरी के राजा वसुपूज्य और रानी जया देवी के यहाँ फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था।इनका प्रतीक चिन्ह बैल है। जैन धर्म की मान्यतानुसार उनकी ऊंचाई 70 धनुष थी। उनके 66 गणधर थे। कुमार देव उनके यक्ष देव हैं और चंद्र देवी उनकी यक्षिणी देवी हैं। भगवान वासुपूज्य ने जीवनभर ब्रह्मचर्य का पालन किया और उन्होंने विवाह नहीं किया। कठोर तपस्या के केवल एक महीने के भीतर ही उन्होंने केवलज्ञान प्राप्त कर लिया। अंततः उन्होंने चंपापुरी (बिहार) में ही आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मोक्ष प्राप्त किया। भगवान वासुपूज्य के पांचों कल्याणक, गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष चम्पापुर बिहार में हीं हुए थे।



