रजौली में पिरामल फाउंडेशन और स्वास्थ्य विभाग का प्रशिक्षण, आंगनबाड़ी सेविकाओं को फाइलेरिया-कालाजार उन्मूलन की दी जानकारी

रजौली (नवादा)। फाइलेरिया और कालाजार जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

रजौली प्रखंड मुख्यालय स्थित इंटर विद्यालय रजौली में बाल विकास परियोजना कार्यालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) सीता कुजूर ने की। प्रशिक्षण में प्रखंड की सभी 6 महिला पर्यवेक्षिकाएं और 150 आंगनबाड़ी सेविकाएं शामिल हुईं।

फाइलेरिया और कालाजार के लक्षण व बचाव की दी जानकारी

पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम ऑफिसर निर्भय कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं को फाइलेरिया और कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में हाथ-पैर में असामान्य सूजन यानी हाथीपांव और पुरुषों में हाइड्रोसील शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को छोड़कर सभी पात्र लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जाने वाले सामूहिक दवा सेवन (MDA) अभियान के तहत फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन जरूर करना चाहिए।

कालाजार के लक्षणों को पहचानने पर दिया जोर

प्रशिक्षण में कालाजार बीमारी के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि यह बालू मक्खी के काटने से फैलने वाला गंभीर संक्रामक रोग है।

लंबे समय तक बुखार रहना, तेजी से वजन घटना और तिल्ली का बढ़ जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेजने की सलाह दी गई।

 

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संदिग्ध मरीजों की पहचान कर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने का निर्देश

बैठक में आंगनबाड़ी सेविकाओं और महिला पर्यवेक्षिकाओं को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फाइलेरिया और कालाजार के संभावित मरीजों की पहचान करें और उन्हें समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में सहयोग करें।

साथ ही पात्र मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने में सहायता करने के लिए भी कहा गया।

जनभागीदारी से ही संभव है बीमारियों पर नियंत्रण

निर्भय कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए जनभागीदारी और जागरूकता सबसे जरूरी है। उन्होंने लोगों से घर और आसपास साफ-सफाई रखने, पानी जमा नहीं होने देने और रात में नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इन बीमारियों की रोकथाम में आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। सेविकाएं घर-घर जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव और बीमारी के लक्षणों की जानकारी देकर जागरूक कर सकती हैं।

पिरामल फाउंडेशन के अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि गांव-गांव तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाई जा सके।

 

 

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