देवघर में अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस पर भव्य समारोह, माताओं का हुआ सम्मान

माँ घर को केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि खुशियों का मंदिर बनाती है : डॉ. जय चंद्र राज

देवघर। स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा संत माइकल एंग्लो विद्यालय के युग्म बैनर तले सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल के भव्य सभागार में पचास माताओं को संत माइकल एंग्लो विद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जय चंद्र राज, वेक्सो इंडिया के संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रवीण कुमार सिंह, मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका शोभना सिंह, वर्तमान प्रधानाध्यापिका विशु किरण एवं फ़ूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट के व्याख्याता डॉ. श्वेता लिंगवाल के करकमलों से सम्मानित किया गया जिन्होंने ‘माँ का कर्तव्य’ संगोष्ठी में अपनी -अपनी भागीदारी निभाई थी। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुख्य वक्ता, संत माइकल एंग्लो विद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जयचंद्र राज ने मातृ दिवस पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा- सृष्टि की रचना में ईश्वर ने यदि सबसे सुंदर और पवित्र किसी चीज़ का निर्माण किया है, तो वह है ‘माँ’।

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ब्रह्मांड है जिसमें प्रेम, त्याग, करुणा और सहनशीलता समाहित है। किसी ने सच ही कहा है कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता, इसलिए उसने माँ को बनाया। एक बच्चे के जीवन में माँ की भूमिका नींव के पत्थर की तरह होती है, जिसके बिना जीवन रूपी इमारत कभी खड़ी नहीं हो सकती। माँ घर को केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि खुशियों का मंदिर बनाती है। माँ के बिना जीवन की कल्पना करना भी हृदय को झकझोर देता है। वह माँ ही है जो नौ महीने तक अपनी संतान को गर्भ में पालती है और असहनीय पीड़ा सहकर उसे इस दुनिया में लाती है। जन्म के बाद भी, बच्चे की पहली मुस्कान से लेकर उसकी हर छोटी-बड़ी सफलता तक, माँ ही सबसे अधिक हर्षित होती है।

माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है; वह बदले में कुछ नहीं माँगती। वह रात भर जागती है ताकि उसकी संतान चैन से सो सके। शोभना सिंह ने कहा- माँ बच्चे की पहली गुरु होती है। वह न केवल हमें बोलना और चलना सिखाती है, बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों और संस्कारों से भी परिचित कराती है। जब बच्चा गिरता है, तो माँ का हाथ ही उसे सहारा देता है और जब वह हताश होता है, तो माँ की ममतामयी गोद उसे शांति प्रदान करती है। माँ की उपस्थिति मात्र से ही घर का कोना-कोना जीवंत और सुरक्षित महसूस होता है। डॉ. श्वेता ने कहा- माँ के बिना जीवन उस पौधे के समान है जिसे जड़ से काट दिया गया हो। घर में चाहे कितनी भी सुख-सुविधाएँ क्यों न हों, यदि माँ नहीं है, तो वह घर केवल ईंट-पत्थर का एक ढांचा मात्र रह जाता है।

विशु किरण ने कहा- माँ की अनुपस्थिति में जीवन की राहें कठिन और संघर्षमय लगने लगती हैं। वह माँ ही होती है जो हमारी अनकही बातों को हमारी आँखों से पढ़ लेती है। उसके बिना, वह व्यक्ति हमेशा के लिए खो जाता है जो हमें बिना किसी शर्त के प्यार करता था। कार्यक्रम के अंत में अनन्या कुमारी सिंह एवं आराध्या कुमारी सिंह ने अपनी नृत्य प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। मिली जानकारी के अनुसार सुकीर्ति बणिक, प्रियंका कुमारी, वर्षा कुमारी शर्मा, पूनम कुमारी (दुमका), नया चितकाठ मध्य विद्यालय की पूनम झा, कंचन मूर्ति साह, मधुपुर की अदिति कुमारी, मनीषा घोष, रिंकू बरनवाल, ब्लू बेल्स स्कूल की पूनम झा, एकलव्य पब्लिक स्कूल की रेखा कुमारी, प्रेमलता देवी, प्रियांशु प्रिया, स्नेहा सिन्हा, सुस्मिता हालदार, प्रीति कुमारी, कुमारी अलका सोनी, प्रो. (डॉ.) रामनंदन सिंह, माधुरी कुमारी सिंह, स्निग्धा बणिक, मंजूषा सिंह, मनीषा सिंह, प्रिया केशरी, मोनिका केशरी, सोमा घोष, बिहार से पूनम कुमारी, रुपम कुमारी, पूजा कुमारी, मंजुला कांत, सुलेखा विश्वास, श्वेता दूबे, डॉ. रूपा कुमारी, विशु किरण, ज्योति देवी, रेखा कुमारी, सोनाली कुमारी, डॉ. श्वेता लिंगवाल, रश्मि ठाकुर, अर्चना केशरी, रजनी केशरी, वीणा केशरी, सोनम कुमारी, सुमन कुमारी, शिवांगी झा, श्रद्धा रानी, शोभना सिंह व सुमित्रा देवी का नाम सूचिबद्ध था।

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