डाक प्रक्रिया रोकने के बाद ग्राम सभा का बड़ा फैसला, 4 फरवरी को बहु-स्तरीय बैठक
प्रशासन पर पेसा कानून उल्लंघन का आरोप

ठेठईटाँगर: कोरोंजो मेला की ठेकेदारी एवं डाक प्रक्रिया को लेकर विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 2 फरवरी दिन सोमवार को दमकी पंचायत सभागार में प्रशासन द्वारा मुखिया एवं पंचायत सचिव के माध्यम से मेला की डाक भरवाने के लिए आयोजित बैठक में ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों के तीखे विरोध के बाद डाक प्रक्रिया को रोक दिया गया।
डाक रोके जाने के बाद ग्राम प्रधानों ने स्पष्ट किया कि अब ग्राम सभा 4 फरवरी को कोरोंजो जतरा टांड़ में बहु-स्तरीय ग्राम सभा बैठक करेगी। इस बैठक में पाँच ग्राम सभाओं के ग्राम प्रधान एवं ग्रामीण शामिल होंगे, जिसमें मेला के संचालन और प्रबंधन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन पर पेसा नियमावली के सीधे उल्लंघन का आरोप
ग्राम सभा ने प्रशासन पर पेसा नियमावली 2026 के सीधे उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि पेसा नियमावली के अध्याय 16, धारा 34 के तहत अनुसूचित क्षेत्र में लगने वाले हाट-बाजार और मेलों के संचालन एवं प्रबंधन का अधिकार सीधे ग्राम सभा को प्राप्त है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा टेंडर, ठेकेदारी और डाक प्रक्रिया थोपने का प्रयास किया गया, जो ग्राम सभा के अधिकारों का हनन है।
ग्राम सभा का स्पष्ट ऐलान
बहु-स्तरीय ग्राम सभा की ओर से कहा गया कि “ग्राम सभा अपने संवैधानिक अधिकार के तहत कोरोंजो मेला का संचालन और प्रबंधन स्वयं करेगी। प्रशासन द्वारा हमारे अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
ग्राम सभा ने साफ कहा कि हर हाल में ग्राम सभा अपना अधिकार लेकर रहेगी और मेला संचालन का निर्णय ग्राम सभा के प्रस्ताव के अनुसार ही होगा।
चेतावनी: ग्राम सभा की न्यायालय व्यवस्था के तहत कार्रवाई
ग्राम सभा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा पेसा नियमावली का उल्लंघन जारी रखा गया, तो ग्राम सभा अपनी पारंपरिक न्यायालय व्यवस्था के तहत संबंधित पदाधिकारियों को नोटिस जारी करेगी। ग्राम सभा ने कहा कि इस व्यवस्था के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को ग्राम सभा के न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और जवाबदेही प्रस्तुत करनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर इसके बाद औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
भारत आदिवासी पार्टी का समर्थन
इस मामले पर अमृत चिराग तिर्की, भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष, ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा “पेसा नियमावली 2026 के अध्याय 16, धारा 34 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अनुसूचित क्षेत्र में लगने वाले हाट-बाजार और मेलों के संचालन, प्रबंधन और नियंत्रण का अधिकार सीधे ग्राम सभा को प्राप्त है। यह अधिकार प्रशासन या प्रखंड कार्यालय का नहीं, बल्कि ग्राम सभा का संवैधानिक अधिकार है।”
उन्होंने आगे कहा “प्रशासन जबरदस्ती पंचायती राज अधिनियम 2001 के नियमों को यहां लागू करने का प्रयास कर रहा है, जबकि यह साफ है कि पंचायती राज अधिनियम 2001 सामान्य क्षेत्रों के लिए है। अनुसूचित क्षेत्रों में इसके ऊपर पेसा कानून और उसकी नियमावली प्रभावी होती है, जो ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार देती है।”
अमृत चिराग तिर्की ने दोनों कानूनों के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा “जहां पंचायती राज अधिनियम 2001 में मेला और बाजार से जुड़े निर्णय पंचायत या प्रशासन के माध्यम से होते हैं, वहीं पेसा नियमावली 2026 ग्राम सभा को सीधे निर्णय लेने, मेला संचालन करने और उसका प्रबंधन करने का अधिकार देती है। ऐसे में पेसा लागू होने के बाद जेपीआर 2001 के नियमों को थोपना पूरी तरह गैरकानूनी है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा “भारत आदिवासी पार्टी ग्राम सभा के इस संवैधानिक संघर्ष में पूरी तरह साथ खड़ी है। यदि प्रशासन ने पेसा नियमावली 2026 का उल्लंघन जारी रखा और ग्राम सभा के अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया, तो इस मामले में संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।



