हिंदी ग़ज़ल पर शोध कर आनंद वर्द्धन बने ‘डॉक्टर’ प्राप्त किया पीएचडी की उपाधि

वारिसलीगंज में खुशी की लहर

वारिसलीगंज (नवादा)। वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र के माफी गांव निवासी रौशन सिंह के पुत्र आनंद वर्द्धन ने पटना विश्वविद्यालय से “हिंदी गजल और बिहार : एक अनुशीलन” विषय पर शोध कार्य पूर्ण कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। 26 फरवरी 2026 को पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित खुली मौखिकी (ओपन वाइवा) में उन्होंने अपने शोध प्रबंध के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा परीक्षकों के सभी प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया।

मौके पर बाह्य परीक्षक के रूप में विश्व भारती, शांति निकेतन से ऑनलाइन जुड़े प्रो. (डॉ.) मुक्तेश्वर नाथ तिवारी, शोध निदेशक प्रो. (डॉ.) इंद्र नारायण सिंह तथा हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने यूजीसी के प्रावधानों के तहत उन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान करने की संस्तुति की। इस उपलब्धि पर पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तरुण कुमार सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों में हर्ष का वातावरण देखा गया।बताया जाता है कि आनंद वर्धन पूर्व में यूजीसी नेट-जेआरएफ भी उत्तीर्ण कर चुके हैं।

वर्तमान में वे माननीय पटना उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति शशि भूषण प्रसाद सिंह की पीठ में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक सफलता से वारिसलीगंज क्षेत्र में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और शोधार्थियों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
भूतपूर्व शिक्षक मिथिलेश सिंह, परशुराम सिंह, नागेंद्र शर्मा ‘बंधु’, डॉ. गोविंद जी तिवारी’ सहित अनेक गणमान्य लोगों ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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