समाजसेवा की मिसाल: ‘ऑक्सीजन मैन’ बाबा बलियासे

Deoghar : कोरोना महामारी ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया था। अस्पतालों में बेड, दवाइयों और सबसे अधिक ऑक्सीजन की भारी किल्लत देखने को मिली। इस दौर में जब आम लोग व्यवस्था की सीमाओं से जूझ रहे थे, तब कुछ ऐसे समाजसेवी सामने आए जिन्होंने मानवता की मिसाल पेश की। इन्हीं में से एक नाम है समाजसेवी बाबा बलियासे, जिन्हें लोग आज सम्मान के साथ ‘ऑक्सीजन मैन’ के नाम से जानते हैं।
कोरोना काल में मानवता की मिसाल
कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में स्थिति बेहद भयावह थी। हर तरफ डर, असहायता और अफरा-तफरी का माहौल था। लोग अपने परिजनों को बचाने के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। ऐसे कठिन समय में बाबा बलियासे ने समाजसेवा को ही अपना संकल्प बना लिया। उन्होंने बिना किसी जाति, धर्म या सामाजिक भेदभाव के जरूरतमंद मरीजों की सहायता शुरू की।
दिन हो या रात, एक फोन कॉल पर वे मरीजों के घर या अस्पताल तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने में जुट जाते थे। कई बार उन्हें संक्रमित इलाकों में भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपनी जान की परवाह नहीं की। उनका एकमात्र उद्देश्य था—अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना।
ऑक्सीजन नेटवर्क की स्थापना
जब सरकारी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं दबाव में आ गई थीं, उस समय बाबा बलियासे ने अपने निजी संसाधनों, मित्रों, स्वयंसेवकों और समाज के सहयोग से एक मजबूत ऑक्सीजन नेटवर्क खड़ा किया। इस नेटवर्क के माध्यम से ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, जरूरी दवाइयां और मेडिकल उपकरण जरूरतमंदों तक पहुंचाए गए।
खास बात यह रही कि यह सारी सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क थीं। उन्होंने कभी किसी से पैसे की मांग नहीं की और न ही मदद के बदले किसी प्रकार की पहचान या प्रचार की अपेक्षा रखी। यही कारण है कि लोग उन्हें सच्चे अर्थों में मानवता का सेवक मानते हैं।
ऑक्सीजन से आगे भी सेवा
बाबा बलियासे की सेवा केवल ऑक्सीजन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कोरोना मरीजों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, अस्पतालों में बेड खोजने में मदद की और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके साथ ही, उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद और गरीब परिवारों तक राशन भी पहुंचाया। कई परिवार ऐसे थे जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह बंद हो चुकी थी। बाबा बलियासे और उनकी टीम ने ऐसे परिवारों को भोजन और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराकर उन्हें संबल दिया।
सैकड़ों जिंदगियों के लिए बने सहारा
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा बलियासे की मदद से सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोगों को नई जिंदगी मिली। कई ऐसे परिवार जिन्होंने अपने प्रियजनों को बचाने की उम्मीद छोड़ दी थी, बाबा बलियासे की तत्परता और सेवा भावना के कारण उन्हें जीवनदान मिला।
उनकी यह सेवा केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि एक मानवीय आंदोलन बन गई। संकट के समय वे लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए।
कोरोना के बाद भी जारी समाजसेवा
कोरोना महामारी का असर कम होने के बाद भी बाबा बलियासे की समाजसेवा रुकी नहीं। आज भी वे गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद में लगातार सक्रिय हैं। किसी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता हो, किसी जरूरतमंद को रक्तदान की आवश्यकता हो या किसी बेसहारा को सहारा देना हो—बाबा बलियासे हमेशा आगे रहते हैं।
वे युवाओं को भी समाजसेवा के लिए प्रेरित करते हैं और बताते हैं कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर मानवता की सेवा कर सकता है। उनका मानना है कि समाज की असली तरक्की तभी संभव है जब हम एक-दूसरे के दुख-दर्द को समझें और मदद के लिए आगे आएं।
जनता के दिलों में खास स्थान
स्थानीय लोग बाबा बलियासे को केवल एक समाजसेवी नहीं, बल्कि संकट के समय उम्मीद की मजबूत पहचान मानते हैं। उनकी सादगी, निस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रति समर्पण ने उन्हें लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया है। यही कारण है कि आज वे प्यार और सम्मान से ‘ऑक्सीजन मैन’ कहलाते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
- बाबा बलियासे की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और सच्ची नीयत के साथ एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने यह दिखा दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और जरूरत के समय एक हाथ बढ़ाना ही सच्ची समाजसेवा है।



