रिखिया केस 80/2019 में सभी 19 आरोपी बरी, साक्ष्य के अभाव में नहीं बना मामला

देवघर। बहुचर्चित रिखिया केस संख्या 80/2019 में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 19 अभियुक्तों को बरी कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि नहीं करते।
यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव 2019 के बाद ईवीएम मशीनों से जुड़े कथित ट्रक विवाद से संबंधित था। उस समय ईवीएम से भरे वाहन के परिवहन को लेकर संदेह की स्थिति बनी थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दिया था। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव के बाद मामला दर्ज किया गया था।
गवाह के बयान से कमजोर पड़ा केस
सुनवाई के दौरान एक प्रमुख गवाह ने अदालत में बताया कि न तो किसी वाहन की लूट हुई थी और न ही किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई थी। इस बयान के बाद अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया और आरोप सिद्ध नहीं हो सके।
बचाव पक्ष की दलीलें हुईं असरदार
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि पूरा मामला ठोस साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। गवाहों के बयानों और घटनाक्रम के विश्लेषण के आधार पर आरोपों को निराधार बताया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
प्रमुख लोगों को मिली राहत
बरी किए गए लोगों में शशांक शेखर भोक्ता (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष) और सुरेश पासवान समेत कुल 19 आरोपी शामिल हैं।
फैसले पर प्रतिक्रिया
फैसले के बाद शशांक शेखर भोक्ता ने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।”
वहीं सुरेश पासवान ने कहा कि पूरे मामले में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका और उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था।
कानूनी महत्व
अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए ठोस साक्ष्य और विश्वसनीय गवाही जरूरी होती है। केवल संदेह या आरोप के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।
यह फैसला न केवल आरोपियों के लिए राहत भरा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य के महत्व को भी रेखांकित करता है।



