वर्षा जल संचयन को अपनाएं और पानी की बर्बादी रोकें : सुबोध झा 

विश्व पृथ्वी दिवस पर रंगभरो एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेता हुए पुरस्कृत

  • वायु, जल और मृदा प्रदूषण ने पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ दिया है 

देवघर। स्थानीय दीनबंधु उच्च विद्यालय के भवानी शंकर बागची सभागार में साइंस एंड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन एवं प्रफुल्ल-कनकलता सिकदार स्मृति न्यास के युग्म बैनर तले आयोजित साप्ताहिक विश्व पृथ्वी दिवस के अंतर्गत पिछले दिन आयोजित रंगभरो एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को साइंस आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जय चंद्र राज, राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, साइंस फॉर सोसाइटी, देवघर इकाई के अध्यक्ष प्रो. रामनंदन सिंह, सचिव सुबोध कुमार झा, सिकदार ट्रस्ट के सचिव काजल कांति सिकदार, वेक्सो इंडिया के देवघर जिला समिति के अध्यक्ष सुमन सौरभ के करकमलों से प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार रंगभरो प्रतियोगिता में नील आनंद को प्रथम, प्रियांशु शेखर एवं शिवम् कुमार रमानी को युग्म रूप से द्वितीय, रितिका कुमारी, बेबी कुमारी एवं आयुष कुमार को संयुक्त रूप से तृतीय, अमरजीत कुमार को चतुर्थ, अमन कुमार को पंचम, कशिश प्रिया को षष्ठ, निशांत राज को सप्तम, मुस्कान सिंह को अष्टम, अंकित कुमार को नवम, शौर्य मयंक को दशम जबकि धर्मवीर कुमार पोद्दार, पीयूष कुमार, रीतेश कुमार, निखिल कुमार दूबे एवं दर्शन राज को सराहनीय पुरस्कार, ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ शीर्षक निबंध लेखन प्रतियोगिता में बेबी कुमारी को प्रथम, कशिश प्रिया को द्वितीय, आकृति कुमारी वर्णवाल को तृतीय, अमन कुमार को चतुर्थ, आस्था कुमारी को पंचम, आयुष कुमार को षष्ठ, मुस्कान सिंह को सप्तम, निशांत राज को अष्टम एवं शौर्य मयंक सिंह को नवम पुरस्कार प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रो. रामनंदन सिंह ने सभी विजेताओं का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा- विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजित किया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी। अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। मुख्य अतिथि डॉ. जे.सी. राज ने कहा- ​आज हमारी पृथ्वी कई गंभीर संकटों से जूझ रही है। यदि समय रहते इनका समाधान नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए अस्तित्व बचाना कठिन हो जाएगा। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है। इससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। वायु, जल और मृदा प्रदूषण ने पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ दिया है। विशिष्ट अतिथि सुबोध झा ने कहा- ​वृक्ष पृथ्वी के फेफड़े हैं। अधिक से अधिक पेड़ लगाने से न केवल ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने और तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। वर्षा जल संचयन को अपनाएं और पानी की बर्बादी रोकें। डॉ. देव ने कहा- एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करें। कपड़े के थैलों का उपयोग करें।​प्रदूषण: प्लास्टिक कचरा विशेष रूप से समुद्री जीवन के लिए काल बन गया है। सुमन सौरभ ने कहा- आधुनिक युग में औद्योगिक प्रगति और उपभोगवादी संस्कृति के कारण पृथ्वी के पर्यावरण को जो क्षति पहुँची है, उसके प्रति जागरूकता फैलाने और संरक्षण का संकल्प लेने के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। अंत में काजल कांति सिकदार ने धन्यवाद ज्ञापन के पहले कहा- वनों की कटाई और प्राकृतिक आवासों के विनाश के कारण पौधों और जानवरों की हजारों प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिका मनीषा घोष, सुदीप्ता चक्रबर्ती, भारती मैम, शिक्षक उदय कुमार मंडल, जीतेन्द्र कुमार चंद्र, सुनील कुमार सुर, मुनेश्वर प्रसाद यादव एवं अन्य की अहम भूमिका रही।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button