बागवानी और हाई-वैल्यू खेती से बदलेगी बिहार की तस्वीर : रामकृपाल
बागवानी और विशिष्ट फसलें, किसानों की आय बढ़ाने का नया ए.टी.एम. मॉडल

पटना। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव,ने शुक्रवार को गाँधी मैदान, पटना में तीन दिवसीय बागवानी महोत्सव का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल,ने किया। मंत्री ने कहा कि बिहार की असली ताकत खेतों में पसीना बहाने वाले हमारे किसान भाई-बहन हैं। सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि किसान मजबूत होंगे, तभी बिहार मजबूत बनेगा। इसी सोच के साथ राज्य सरकार बागवानी, उच्च मूल्य वाली खेती, आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ बाजार व्यवस्था को कृषि विकास का मुख्य आधार बना रही है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का एक स्पष्ट और दूरदर्शी सपना है ह्लहर भारतीय की थाली में बिहार का कम-से-कम एक व्यंजन हो।
यह केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि बिहार के लिए एक सशक्त आर्थिक क्रांति का विजन है। जब बिहार का लिट्टी-चोखा, मखाना, फल-सब्जियाँ और अन्य कृषि उत्पाद देश की हर थाली तक पहुँचेंगे, तब किसानों की आय बढ़ेगी, राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और बिहार की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी। यह संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकल टू ग्लोबल विजन से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार और किसानों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। बिहार सरकार इसी दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारी रणनीति स्पष्ट है, हर जिले की एक विशिष्ट फसल होगी, उसी के आधार पर क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होंगी और उत्पादों को सशक्त बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
यह मॉडल खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ते हुए किसानों के लिए स्थायी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।आज बिहार की खेती एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। यह केवल बदलाव नहीं, बल्कि कृषि का नवजागरण है, जहाँ किसान अब उत्पादक के साथ-साथ उद्यमी और निर्यातक भी बन रहा है। बिहार कृषि निर्यात नीति के जरिए किसानों की उपज को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। मखाना, शहद, फल-सब्जियाँ, मसाले और ॠ.क. टैग प्राप्त उत्पाद बिहार की गुणवत्ता और पहचान को मजबूत कर रहे हैं। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और प्रस्तावित शहद नीति आय वृद्धि का सशक्त आधार हैं। हर जिले में विशेष फसल आधारित क्लस्टर बनाकर खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ा जाएगा। बागवानी और विशिष्ट फसलें आज किसानों के लिए एटीएम के समान हैं, जो त्वरित आय और स्थायी समृद्धि का मार्ग खोलती हैं।
मंत्री ने कहा कि अब खेती को कम लागत और अधिक मुनाफे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। धान और गेहूँ के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, केला, आंवला, सब्जी एवं मसाला फसलें जैसे मिर्च, हल्दी, धनिया, लहसुन और प्याज किसानों की आय बढ़ाने का नया इंजन बन सकती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के हर जिले में स्थानीय जलवायु के अनुरूप हाई-वैल्यू क्लस्टर विकसित किए जाएँ, जहाँ नर्सरी से लेकर उत्पादन, पैकिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री की समुचित व्यवस्था एक ही स्थान पर हो।प्रधान सचिव, कृषि नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसमें बागवानी विशेषकर फल, सब्जी, मसाला, मखाना एवं मधुमक्खी पालन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा उच्च मूल्य वाली फसलों एवं संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
महोत्सव में किसानों को विभिन्न योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है एवं किसानों द्वारा लाए गए उत्कृष्ट उत्पादों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। निदेशक उद्यान अभिषेक कुमार ने बागवानी महोत्सव में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य खेत से बाजार तक मूल्य संवर्धन के माध्यम से अधिक आय और रोजगार सुनिश्चित करना है। उन्होंने बागवानी फसलों के उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग एवं निर्यात पर विशेष जोर दिया। ड्रैगन फ्रूट व स्ट्रॉबेरी जैसे एग्जॉटिक फलों तथा ड्रिप, स्प्रिंकलर व माइक्रो-स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मखाना के लिए गठित मखाना बोर्ड निर्यात को नई दिशा देगा और असली परिवर्तन किसानों के खेतों में दिखेगा।



