मोदी युग में भारत का ‘स्वर्ण काल’: कूटनीति और व्यापार से बदलती वैश्विक पहचान

अमेरिका से व्यापारिक समझौते को जिलाध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने बताया भारत की आर्थिक और सामरिक मजबूती का प्रतीक

गुलाबबाग (पूर्णिया)। भारत की वैश्विक भूमिका पिछले एक दशक में तेजी से बदली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति ने भारतीय कूटनीति को नई दिशा दी है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रिश्तों में भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका के साथ हालिया व्यापारिक समझौते को इसी बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
गुलाबबाग मार्केटिंग यार्ड स्थित आलू-प्याज-लहसुन-मिर्ची व्यावसायिक संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने कहा कि यह समझौता केवल शुल्क और आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता का प्रमाण है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने भारत को विश्व पटल पर “विश्वस्त मित्र” के रूप में स्थापित किया है।

सप्लाई चेन का उभरता केंद्र
जायसवाल ने कहा कि एक समय वैश्विक सप्लाई चेन एक ही धुरी पर निर्भर थी, जिससे अर्थव्यवस्था में असंतुलन का खतरा बना रहता था। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों ने भारत को एक मजबूत विकल्प के रूप में तैयार किया है। आज जब पश्चिमी देश चीन के विकल्प की तलाश कर रहे हैं, तो भारत स्वाभाविक रूप से उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।
उनके मुताबिक, यह समझौता संकेत देता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कूटनीति में आर्थिक दृष्टिकोण
जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी दौरों को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर आर्थिक कूटनीति का प्रभावी माध्यम बनाया है। अमेरिका जैसे महाशक्ति के साथ व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना स्पष्ट विजन और नेतृत्व क्षमता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज वाशिंगटन में भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जाता है।

रोजगार और निर्यात को मिलेगा बल
जायसवाल के अनुसार, टैरिफ में कमी से भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे रोजगार सृजन को गति मिलेगी। साथ ही, सप्लाई चेन की मजबूती भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता को भी दर्शाती है, जहां देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक शक्तियों से बराबरी के स्तर पर संवाद कर रहा है।

नई वैश्विक व्यवस्था की ओर
उन्होंने कहा कि सॉफ्ट पावर और हार्ड पावर के संतुलन ने भारत को उस मुकाम पर पहुंचाया है, जहां वह वैश्विक दिशा तय करने में भूमिका निभा सकता है। मजबूत नेतृत्व से ही दुनिया कदम से कदम मिलाकर चलती है, और यह समझौता उसी का उदाहरण है।
बिहार बजट पर भी जताया भरोसा
बिहार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश जायसवाल ने कहा कि अब तक के सबसे बड़े बजट से राज्य के विकास को नई रफ्तार मिलेगी और समृद्ध बिहार के लक्ष्य को बल मिलेगा।

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