रजौली में जैव विविधता प्रबंधन पर जिला स्तरीय कार्यशाला, संरक्षण के प्रति ग्रामीणों को किया जागरूक

📍रजौली (नवादा) | मनीष कुमार
वन प्रमंडल नवादा के सौजन्य से बुधवार को रजौली प्रखंड के ग्राम पंचायत रजौली पश्चिमी स्थित पंचायत सरकार भवन, छपरा में जैव विविधता प्रबंधन समिति की जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीणों एवं समिति सदस्यों को जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण तथा सतत विकास के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला में राज्य जैव विविधता प्रबंधन समिति के डिप्टी डायरेक्टर मिहिर कुमार झा, अमरेश बिहारी झा एवं हेम कांत राय ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। इसके अलावा वन प्रमंडल पदाधिकारी कृष्णा श्रेष्ठ, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, मत्स्य पालन विभाग के अधिकारी, पशु चिकित्सक डॉ. अभय, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी हरिमोहन कुमार, क्षेत्र पदाधिकारी नारायण लाल सेवक सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में रजौली, सिरदला तथा जिले के विभिन्न पंचायतों की जैव विविधता प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्यों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय वनस्पतियों एवं जीवों की पहचान, पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) तैयार करने, वनों के संरक्षण तथा सतत विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती और स्थानीय बीजों के संरक्षण पर बल दिया, जबकि मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने जलीय एवं पशु जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं अल्पाहार की व्यवस्था की गई। साथ ही जैव विविधता संबंधी अध्ययन सामग्री, एक झोला और कलम वितरित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को आवागमन के लिए 200 रुपये का यात्रा भत्ता भी प्रदान किया गया।
वन प्रमंडल पदाधिकारी कृष्णा श्रेष्ठ ने बताया कि जैव विविधता अधिनियम 2002 के तहत प्रत्येक पंचायत में जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन अनिवार्य है। इन समितियों का दायित्व स्थानीय जैव संसाधनों का दस्तावेजीकरण तथा उनके संरक्षण की योजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य समिति सदस्यों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों से अवगत कराना है, ताकि गांव स्तर पर जैव विविधता संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों एवं समिति सदस्यों ने जैव विविधता संरक्षण की शपथ ली। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने पंचायत का पीबीआर रजिस्टर बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी।



