गर्मी में छबील सेवा के माध्यम से दी गई गुरु अर्जुन देव जी महाराज को श्रद्धांजलि, रजौली में बांटा गया ठंडा-मीठा शरबत
श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज की शहादत में गर्मी में ठंडा-मीठा पानी पिलाकर दी जाती है श्रद्धांजलि

रजौली/नवादा (मनीष कुमार) : सिख धर्म के पांचवें गुरु, धन धन श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज की शहादत को याद करते हुए देशभर में ‘छबील सेवा’ की परंपरा निभाई जा रही है। भीषण गर्मी में राहगीरों को ठंडा-मीठा पानी और शरबत पिलाकर गुरु साहिब को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसी भाव को लेकर रजौली के दिबौर स्थित ‘खालसा ढाबा’ के समीप आनेजाने वाले छोटे एवं बड़े वाहनों में सवार लोगों के बीच शीतल पेयजल वितरित किया गया।
आयोजनकर्ता अवतार सिंह, गुरुटेक सिंह एवं विकास सिंह ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पांचवें गुरु थे। वे महान संत, विद्वान और हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर के निर्माता थे। उन्होंने 1604 में सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘आदि ग्रंथ साहिब’ का संकलन किया। 1606 में मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर उन्हें सत्य और धर्म पर अडिग रहने के कारण भीषण यातनाएं दी गईं। उन्हें तपते तवे पर बैठाया गया और शरीर पर गर्म रेत डाली गई।
इस असीम पीड़ा में भी गुरु साहिब ने मुस्कुराते हुए कहा था: “तेरा किया मीठा लागे” यानी, हे प्रभु, जो तू करता है वह मुझे मीठा लगता है। गुरु साहिब को भीषण गर्मी में दी गई यातनाओं की स्मृति में सिख समुदाय ने ‘छबील सेवा’ की परंपरा शुरू की। इसके तहत बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों को ठंडा पानी, मीठा शरबत और अन्य पेय पदार्थ पिलाए जाते हैं।
यह सेवा निःस्वार्थ भाव, करुणा और मानवता का प्रतीक है।गर्मी के इस मौसम में जगह-जगह गुरुद्वारों और सामाजिक संगठनों द्वारा छबील लगाई जा रही है। “आओ गुरु की याद में, सेवा करिए – ठंडा मीठा पानी, सरबत दा भला” के संदेश के साथ लोग बढ़-चढ़कर सेवा कर रहे हैं।



