Nawada: महिलाओं ने दी अरथी को कंधा और चिता को अग्नि, मानववादी पहल की चर्चा
नवादा में महिलाओं ने दी अरथी को कंधा, श्मशान घाट तक पहुंचाकर तोड़ी रूढ़िवादी परंपरा

नवादा/ सागर राज। जिला मुख्यालय के लाइन पर मिर्जापुर निवासी सह मानववादी संगठन अर्जक़ संघ आर्थिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर ब्रह्मदेव प्रसाद की पत्नी 70 वर्षीया सुधारानी का निधन उपरांत सोमवार को महिलाओं ने अरथी को कंधा देकर शमशान घाट तक पहुंची। ऐसे धार्मिक व रूठीवादी मान्यताओं के अनुसार महिलाओं के द्वारा अरथी कंधा देना व शमशान घाट तक पहुंचाना वर्जित है। ऐसे में मानववादी संगठन अध्यक्ष संघ के पहल पर महिलाओं ने न सिर्फ अरथी को कंधा दी, बल्कि शमशान घाट तक भी पहुंचाई और चिता को अग्नि भी दिया।
जिसके कारण यह बात इलाके में चर्चा की विषय बनी हुई है। अरथी को कंधा देने वालों में मृतका की पुत्री इंजीनियर विदुषी भारती, पतोहू मधुवाला कुमारी व नेहा कुमारी, पोती टिमतिम, टूटू व टिया के अलावा बड़ी संख्या में अर्जक़ संघ से प्रभावित महिलाओं सुरभि कुमारी, रंजू कुमारी आदि ने अरथी को कंधा दी। शव यात्रा के दौरान राम नाम सत्य है की जगह जीवन मरण सत्य है, सुधा रानी अमर रहे, सुधारानी जिंदाबाद, मानववाद जिंदाबाद, अर्जक़ संघ जिंदाबाद के जयकारे लगाए जा रहे थे। शव यात्रा का नेतृत्व कर रहे अर्जक़ संघ सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र पथिक ने बताया कि स्त्री पुरुष की समानता को स्थापित करने के लिए यह पहल की जा रही है।
साथ ही अवैज्ञानिक व रूढ़िवादी व्यवस्थाओं को नकार कर मानववादी व्यवस्था स्थापित करने के लिए यह कदम द्वारा उठाया गया। इंजीनियर ब्रह्मदेव प्रसाद मूल रूप से रोह प्रखंड के मनियोचक गांव के निवासी हैं। इस मौके पर मृतिका के पुत्र ई मनीष कुमार, ई नीतीश कुमार के अलावा वरिष्ठ पत्रकार व शिक्षाविद अविनाश निराला, रामसहाय महतो, सुमन सौरभ, सुरेन्द्र प्रसाद, जगदीश प्रसाद केशरी, परमेश्वर मंडल, भुवनेश्वर प्रसाद, राम सहाय प्रसाद, बैजनाथ प्रसाद, सुनील कुमर, नरेंद्र कुमार, गोरेलाल कुमार, सुशील कुमार सिंह, गोपाल भगत, किशोरी शरण वर्मा आदि दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे।



