विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026: “बोझ से समाधान तक” थीम पर सुरक्षित भोजन का संदेश

​विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस- 2026 की थीम है: “बोझ से समाधान तक – हर जगह सुरक्षित भोजन” : डॉ. प्रदीप सिंह देव

देवघर। हर साल 7 जून को दुनिया भर में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस वैश्विक स्तर पर सुरक्षित भोजन के महत्व और दूषित भोजन से होने वाले खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जा रहा है। मौके पर स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- वर्ष 2026 के लिए विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस की आधिकारिक थीम है: “बोझ से समाधान तक – हर जगह सुरक्षित भोजन”। यह थीम इस बात पर केंद्रित है कि दूषित और असुरक्षित भोजन के कारण दुनिया भर में जो स्वास्थ्य और आर्थिक नुकसान हो रहा है, उसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपायों के जरिए कैसे कम किया जाए। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन खाद्य जनित बीमारियों के नए वैश्विक और राष्ट्रीय अनुमान जारी कर रहा है। यह डेटा सरकारों को यह समझने में मदद करेगा कि कौन सी बीमारियां सबसे अधिक नुकसान पहुँचा रही हैं, ताकि वे सही और किफायती समाधान लागू कर सकें। थीम यह याद दिलाती है कि खाद्य जनित बीमारियां पूरी तरह से रोकी जा सकती हैं। यदि सही डेटा और विज्ञान का उपयोग किया जाए, तो हर नागरिक तक सुरक्षित भोजन पहुँचाया जा सकता है। इसके साथ ही, इस अभियान का मूल नारा हमेशा की तरह स्थिर है: “खाद्य सुरक्षा हर किसी का व्यवसाय है”। ​विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस की शुरुआत बहुत पुरानी नहीं है, लेकिन इसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। दिसंबर 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 7 जून को इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। पहला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 7 जून 2019 को मनाया गया था।

इस दिन के वैश्विक आयोजन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के दो प्रमुख संगठनों- विश्व स्वास्थ्य संगठन और खाद्य एवं कृषि संगठन को संयुक्त रूप से सौंपी गई है। असुरक्षित भोजन केवल पेट खराब होने या उल्टी-दस्त तक सीमित नहीं है, यह एक गंभीर वैश्विक संकट है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार: बीमारियों का बोझ: दूषित भोजन के कारण बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या रासायनिक पदार्थों की वजह से 200 से अधिक प्रकार की बीमारियां होती हैं। हर साल दुनिया में लाखों लोग दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा पांच साल से कम उम्र के बच्चों का होता है। असुरक्षित भोजन के कारण विकासशील देशों को उत्पादकता में कमी और चिकित्सा खर्च के रूप में अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है। यह पर्यटन और व्यापार को भी प्रभावित करता है। ​इस दिवस के माध्यम से पांच प्रमुख क्षेत्रों में काम करने की अपील की है: सरकारों को सभी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम और नीतियां बनानी चाहिए, किसानों और कृषि उत्पादकों को खेती में कीटनाशकों और रसायनों का सीमित व सुरक्षित उपयोग करना चाहिए। खाद्य व्यवसायियों, दुकानदारों और ट्रांसपोर्टरों को भंडारण और परिवहन के दौरान स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए। उपभोक्ताओं को जागरूक होना चाहिए कि वे जो भोजन खरीद रहे या घर में बना रहे हैं, वह स्वच्छ और सुरक्षित हो, सरकार, वैज्ञानिक, व्यापारी और उपभोक्ता मिलकर काम करें क्योंकि खाद्य सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। ​भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।

भारत में खाद्य मानकों को तय करने और उनकी निगरानी करने का काम भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण करता है। दूध, घी, मसालों और तेलों में मिलावट आज भी एक बड़ी समस्या है। भारत में रेहड़ी-पटरी पर मिलने वाले भोजन की लोकप्रियता बहुत अधिक है, लेकिन वहां साफ-सफाई और शुद्ध पानी की कमी अक्सर बीमारियों का कारण बनती है। फसलों और फलों को जल्दी पकाने या कीड़ों से बचाने के लिए रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने देश में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘ईट राइट इंडिया’ जैसी कई महत्वपूर्ण मुहिम शुरू की हैं। इसके तहत स्कूलों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थलों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन के लिए प्रमाणित किया जाता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 की थीम “बोझ से समाधान तक” हमें यह सिखाती है कि भोजन का केवल थाली तक पहुँचना काफी नहीं है, उसका सुरक्षित होना भी उतना ही जरूरी है। “फार्म से लेकर फॉर्क तक” (खेत से लेकर कांटे/चम्मच तक) भोजन की शुद्धता बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण केवल सुरक्षित और स्वच्छ भोजन के आधार पर ही किया जा सकता है।

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