रनिया में आदिवासी संस्कृति को सशक्त करने हेतु पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वितरण

रांची/रनिया। झारखंड सरकार के कल्याण विभाग झारखंड के सौजन्य से आज रनिया प्रखंड मुख्यालय में आदिवासी कला केंद्र/धूमकुड़िया भवन के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वितरण किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम में जल, जंगल और जमीन से जुड़ी आदिवासी संस्कृति को संरक्षण देने पर जोर दिया गया। बताया गया कि मांदर, नगाड़ा और बाँसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र केवल संगीत नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, इतिहास और संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।

कार्यक्रम में कहा गया कि धूमकुड़िया जैसे सांस्कृतिक केंद्र आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामूहिक जीवनशैली के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझती है।
इस दौरान पाहन, ग्राम प्रधान और स्थानीय ग्रामीणों के साथ संवाद कर उनकी भावनाओं को भी जाना गया। उपस्थित लोगों ने अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और उत्साह व्यक्त किया।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि आदिवासी कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि यह गौरवशाली विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंच सके।



