मधेपुरा/कोसी दियारा: हरजोड़ा घाट में संरक्षित पक्षियों का शिकार जारी, प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

मधेपुरा/कोसी दियारा। कोसी दियारा का हरजोड़ा घाट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला और भी गंभीर है। पर्यावरण कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह द्वारा 27 मार्च 2026 को भेजे गए आवेदन ने वन विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवेदन क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक भागलपुर, वन प्रमंडल पदाधिकारी भागलपुर, मुख्य वन संरक्षक पूर्णिया और वन प्रमंडल पदाधिकारी सहरसा को भेजा गया था, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में कहा गया है कि तमाम सबूत और पिछले मामलों के बावजूद विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है, जिससे शिकारियों के हौसले बुलंद हैं।

प्रवासी पक्षियों पर मंडरा रहा खतरा
सर्दी के मौसम के समाप्त होने के साथ ही कोसी दियारा क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों की वापसी शुरू हो जाती है। इसी दौरान शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सैकड़ों दुर्लभ और संरक्षित पक्षियों का शिकार किया जाता है। नए साल और अन्य अवसरों पर दूर-दराज से लोग यहां पहुंचकर खुलेआम शिकार करते हैं। वन विभाग और पुलिस की निष्क्रियता के कारण यह अवैध गतिविधि लगातार जारी है।

2023 का शिकार कांड अब भी अधर में
31 दिसंबर 2023 को हरजोड़ा घाट पर बड़े पैमाने पर शिकार का मामला सामने आया था। दिन में संरक्षित पक्षियों का शिकार, रात में टेंट लगाकर जश्न और कई वाहनों का काफिला शामिल था। उस समय कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी की भी चर्चा हुई थी। इस मामले में वीडियो और फोटो भी सामने आए, लेकिन रेंजर द्वारा आवेदन दिए जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।

सीमा विवाद बन रहा कार्रवाई में बाधा
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मधेपुरा और भागलपुर के बीच क्षेत्राधिकार विवाद का हवाला देकर जानबूझकर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही। विभागीय स्तर पर मामले को एक-दूसरे पर टालने का खेल जारी है।

प्रमुख शिकार होने वाली प्रजातियां
यूरेशियन स्नूप बिल। ब्लैक हेडेड प्रजाति। व्हाइट एल्बम। रेड सैंक, ग्रीन सैंक (स्थानीय ‘चाहा’)। जंगली सूअर। गरुड़ जैसे दुर्लभ पक्षी।
विशेषज्ञों के अनुसार ये सभी संरक्षित श्रेणी में आते हैं और इनका शिकार कानूनन अपराध है।

पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में आक्रोश
लगातार हो रहे शिकार और प्रशासन की निष्क्रियता से पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • मुख्य बिंदु:
  • 27 मार्च 2026 को ताजा आवेदन भेजा गया। कई वरिष्ठ वन अधिकारियों को शिकायत की गई।
  • 2023 के शिकार कांड में अब तक FIR नहीं। सीमा विवाद में उलझी जांच। हर साल सैकड़ों पक्षियों का शिकार।
  • वन विभाग के एक पूर्व अधिकारी का कहना है, स्थानीय और प्रवासी सभी पक्षी संरक्षित श्रेणी में आते हैं। इनके शिकार पर
  • पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन निगरानी की कमी से यह धंधा फल-फूल रहा है।
  • यह मामला हरजोड़ा घाट के संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पेश करता है।

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