भारत में 10 साल में दोगुने हुए LPG कस्टमर, आयात तीन गुना बढ़ा – क्या सच में गैस की कमी है?

भारत में LPG की मांग तेज, कई शहरों में लंबी कतारें

भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या पिछले 10 साल में दोगुनी हो गई है, जबकि आयात तीन गुना बढ़ गया है। जानिए सप्लाई, उत्पादन और हालिया गैस संकट को लेकर सरकार क्या कह रही है।

 

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े संघर्ष के बीच भारत के कई शहरों में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में कई जगहों पर गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारें देखी गई हैं।

खासकर लॉज और हॉस्टल में रहने वाले छात्र, जो खुद खाना बनाते हैं, उन्हें काफी परेशानी हो रही है। कई जगहों पर मेस सेवाएं बंद हो रही हैं और कुछ रसोइयों में मेन्यू छोटा कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ इलाकों में लोग लकड़ी जलाकर खाना पकाने तक मजबूर हो रहे हैं।


होटल-रेस्तरां और उद्योगों पर असर

एलपीजी सप्लाई प्रभावित होने की खबरों के बीच कई शहरों में होटल और रेस्तरां के संचालन पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर गरम भोजन की उपलब्धता कम हो गई है।

इसके अलावा फर्टिलाइजर और सिरेमिक उद्योग भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। उद्योगों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।


संसद में विपक्ष का विरोध

इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। Indian National Congress समेत कई दलों के सांसदों ने एलपीजी की स्थिति पर संसद में चर्चा की मांग की।


सरकार का दावा: सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित

केंद्र सरकार का कहना है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने 12 मार्च को Lok Sabha में कहा कि पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन, एटीएफ और अन्य ईंधनों की सप्लाई सामान्य है।

उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं है।

मंत्री के मुताबिक फील्ड रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई जगहों पर जमाखोरी और घबराहट में सिलेंडर बुकिंग बढ़ गई है। यानी सप्लाई की कमी से ज्यादा यह स्थिति लोगों की चिंता और पैनिक के कारण बनी है।


10 साल में दोगुने हुए LPG उपभोक्ता

पिछले एक दशक में भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।

  • घरेलू एलपीजी कनेक्शन लगभग दोगुने हो गए
  • एलपीजी का आयात करीब तीन गुना बढ़ गया
  • जबकि घरेलू उत्पादन की वृद्धि काफी धीमी रही

यही वजह है कि भारत अब अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर होकर पूरा करता है।

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