झारखंड विधानसभा में विधायक राज सिन्हा ने उठाए खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास व निजी टेक्निकल विश्वविद्यालयों में अव्यवस्था के मुद्दे

धनबाद। झारखंड विधानसभा के सचेतक सह धनबाद विधायक राज सिन्हा ने आज विधानसभा में अल्पसूचित एवं तारांकित प्रश्न के माध्यम से धनबाद सहित पूरे झारखंड से जुड़े महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया।
विधायक श्री सिन्हा ने राज्य के खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े गंभीर विषय को सदन के समक्ष रखते हुए कहा कि धनबाद जिला सहित झारखंड के विभिन्न जिलों की लगभग 50 प्रतिशत पंचायतें खनन प्रभावित क्षेत्र में स्थित हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 4345 पंचायतों में से लगभग 2000 पंचायतें माइनिंग प्रभावित क्षेत्र में आती हैं, जिनके विकास के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) कोष से प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य करने का प्रावधान है।

उन्होंने सदन में सवाल उठाया कि डीएमएफटी कोष का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के बजाय रांची, धनबाद, बोकारो, लोहरदगा तथा चतरा जिलों में जिम, डाकबंगला, उपायुक्त कार्यालय एवं कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण में किया गया है, जो कि डीएमएफटी के प्रावधानों के विपरीत है। इस संबंध में महालेखाकार झारखंड द्वारा भी आपत्ति दर्ज की गई है। विधायक श्री सिन्हा ने सरकार से पूछा कि क्या इस प्रकार के गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में किए गए अवैधानिक खर्च की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने का विचार सरकार के पास है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की जोरदार मांग की।
इसके साथ ही विधायक श्री सिन्हा ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से झारखंड में संचालित नौ निजी टेक्निकल विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन विश्वविद्यालयों में अधिकांश स्थानों पर आधारभूत संरचना एवं योग्य फैकल्टी का अभाव है, इसके बावजूद छात्रों को अभियांत्रिकी के विभिन्न विषयों में नामांकन देकर परीक्षाएं कराई जा रही हैं।

उन्होंने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से सवाल करते हुए कहा कि क्या यह सही है कि इन निजी टेक्निकल विश्वविद्यालयों में फैकल्टी की कमी के बावजूद छात्रों के साथ प्लेसमेंट के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है, जिससे छात्रों एवं अभिभावकों का भयादोहन, आर्थिक शोषण एवं मानसिक शोषण हो रहा है।
विधायक श्री सिन्हा ने सदन में कहा कि निजी टेक्निकल विश्वविद्यालयों से अभियंत्रण की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं को राज्य सरकार अब तक उचित प्लेसमेंट दिलाने में असफल रही है, जिसके कारण इन संस्थानों की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि युवाओं के साथ हो रहे इस मानसिक और आर्थिक शोषण पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा अभियंत्रण उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को राज्य के भीतर ही शीघ्र एवं प्रभावी प्लेसमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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