सिमडेगा को मिला विरासत का नया केंद्र: हेरिटेज सेंटर-सह-म्यूजियम का लोकार्पण

सिमडेगा। जिला मुख्यालय स्थित वर्ष 1915 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित पुराने अनुमंडल कार्यालय भवन को जिला प्रशासन ने विकसित कर हेरिटेज सेंटर-सह-म्यूजियम के रूप में जनता को समर्पित किया। आयोजित समारोह में जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इसका विधिवत लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही जिला योजना अनाबद्ध निधि से स्वीकृत 6 करोड़ 20 लाख 10 हजार 589 रुपये की लागत वाली 34 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया।
लोकार्पण समारोह का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंनगाड़ी, तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया, उपायुक्त कंचन सिंह, उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी, अपर समाहर्ता ज्ञानेन्द्र कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। उद्घाटन के बाद सभी अतिथियों ने संग्रहालय का भ्रमण कर वहाँ प्रदर्शित ऐतिहासिक दस्तावेजों, पारंपरिक औजारों तथा सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया।
1915 में बना भवन, 1947 में पहली बार फहराया गया था तिरंगा
यह ऐतिहासिक भवन वर्ष 1915 में अंग्रेजों द्वारा अनुमंडल कार्यालय के रूप में बनाया गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 15 अगस्त 1947 को सिमडेगा में पहली बार इसी भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। बाद में जिला बनने के पश्चात कुछ समय तक इसी भवन में उपायुक्त कार्यालय भी संचालित हुआ। नया अनुमंडल कार्यालय बनने के बाद भवन अनुपयोगी पड़ा था, जिसे अब जिला प्रशासन ने संरक्षित करते हुए हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित किया है।
तीन हिस्सों में विकसित किया गया संग्रहालय
संग्रहालय को तीन प्रमुख भागों में विकसित किया गया है। पहला भाग प्रशासनिक इतिहास से जुड़ा है, जिसमें प्रथम विश्व युद्ध के समय सिमडेगा क्षेत्र से फ्रांस युद्ध में गए लोगों से संबंधित दस्तावेज, 1931 की जनगणना के अभिलेख, लाह उत्पादन से जुड़ी सामग्री और शिक्षा के विकास से संबंधित दस्तावेज प्रदर्शित किए गए हैं।
दूसरे भाग में सिमडेगा की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया है, जहाँ पारंपरिक वस्त्र, कृषि एवं शिकार के उपकरण, पर्व-त्योहारों में प्रयुक्त वस्तुएँ तथा आदिवासी समाज की जीवन शैली से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित की गई है।
तीसरे भाग में पलाश और सुदिनियर शॉप स्थापित की गई है, जिसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ संचालित करेंगी। इसके माध्यम से स्थानीय महिलाओं को आजीविका का अवसर भी मिलेगा।
इतिहास और भविष्य के बीच सेतु बनेगा संग्रहालय : उपायुक्त
उपायुक्त महोदया ने अपने संबोधन में कहा कि यदि वे यह कहें कि आप सभी का यहाँ स्वागत करते हुए उन्हें हर्ष हो रहा है, तो यह एक बहुत छोटा वक्तव्य होगा। वास्तव में वे आज स्वयं को अभिभूत और अत्यंत भावुक महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जैसे पूर्व वक्ताओं ने भी उल्लेख किया, विशेष रूप से उप विकास आयुक्त ने जिस सुंदर ढंग से इस पहल को इतिहास और भविष्य के बीच की एक कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया, वह अत्यंत सार्थक है। ऐसे संस्थान हमें लगातार अपने अतीत से जुड़े रहने का एहसास कराते हैं, ताकि हमारे पैर अपनी जड़ों से जुड़े रहें और हमारी शाखाएँ आकाश की ओर फैलते हुए समाज को शीतल छाया प्रदान कर सकें।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की इमारतें और संस्थाएँ समाज के लिए प्रेरणा, संवाद और सीख का केंद्र बनती हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि जिले की जनता—चाहे वे इससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हों या नहीं—इस विरासत केंद्र का पूरा लाभ उठाएँगे और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएँगे। अतीत से भविष्य तक की विकास यात्रा में यह एक महत्वपूर्ण और सुंदर पड़ाव है।
उपायुक्त महोदया ने कहा कि यदि हम दो-तीन पीढ़ी पहले के समय को देखें, तो जीवन अपेक्षाकृत शांत और स्थिर था। परिवार और समाज एक साये की तरह साथ रहते थे। लोगों को रुककर बैठने, अपने बुजुर्गों से सीखने और उनके अनुभवों को समझने का अवसर मिलता था। उन पीढ़ियों के संचित अनुभव जीवन की दिशा तय करने में सहायक होते थे। लेकिन आज के समय में जीवन की गति बहुत तेज हो गई है। यह गति विकास का प्रतीक भी है, परंतु इसके कारण कहीं न कहीं वह ठहराव और संवाद कम होता गया है, जिसमें हम अपने बुजुर्गों से उनके संघर्षों, अनुभवों और जीवन की कहानियों को सुन सकें।
उन्होंने कहा कि बदलती सामाजिक और पारिवारिक संरचनाओं के बीच आज की युवा पीढ़ी के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि वे विकास की इस तेज यात्रा में अपने अतीत के अनुभवों को कैसे संजोकर रखें और उनसे सीख लें। इसी उद्देश्य से यह संग्रहालय एक महत्वपूर्ण पहल है। भले ही यह आकार में छोटा हो, परंतु यह हमारे समाज की सामूहिक स्मृतियों को संजोने और प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि यह स्थान केवल अतीत की वस्तुओं का प्रदर्शन मात्र नहीं रहेगा, बल्कि एक जीवंत अनुभव बनेगा। जब लोग इस परिसर के गलियारों से गुजरेंगे तो इतिहास मानो उनसे संवाद करेगा। यहाँ प्रदर्शित वस्तुएँ—जैसे पुराने औजार, पारंपरिक उपकरण, खेलों में उपयोग होने वाली वस्तुएँ—बुजुर्गों को अपने बचपन की याद दिलाएँगी और नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर देंगी कि उनके पूर्वज किस प्रकार जीवन जीते थे।
उपायुक्त महोदया ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस पूरे परिसर के संचालन की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ यहाँ सक्रिय भूमिका निभाएँगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता, क्योंकि सदियों से परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं ने ही किया है। चाहे वह भोजन की परंपरा हो, संस्कृति हो या पारिवारिक मूल्य—इन सभी को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि इस परिसर में पलाश मार्ट और अन्य गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के अवसर भी मिलेंगे, जिससे उनका सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक सशक्तिकरण होगा।
अंत में उन्होंने कहा कि इस पहल की सफलता का श्रेय सिमडेगा जिले की जागरूक जनता को भी जाता है, जिन्होंने इस ऐतिहासिक भवन को संग्रहालय के रूप में संरक्षित करने की मांग की। प्रशासन की पूरी टीम ने अथक मेहनत से इस भवन को नया रूप दिया है। उन्होंने उप विकास आयुक्त श्री दीपांकर चौधरी सहित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह विरासत केंद्र भविष्य में सिमडेगा की पहचान और प्रेरणा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
उप विकास आयुक्त ने बताया संग्रहालय का महत्व
उप विकास आयुक्त श्री दीपांकर चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का यह अवसर केवल एक भवन के लोकार्पण का अवसर नहीं है, बल्कि यह सिमडेगा की स्मृतियों, इतिहास और समाज के सामूहिक अनुभवों को पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण क्षण है।
सिमडेगा के हृदय में स्थित यह पुराना अनुमंडल भवन कभी प्रशासन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इन गलियारों से प्रशासनिक आदेश जारी होते थे, फाइलें चलती थीं और शासन-प्रशासन की पूरी प्रक्रिया यहीं से संचालित होती थी। वर्ष 1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली, तब इसी परिसर में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। अलग झारखंड राज्य की परिकल्पना और उससे जुड़े आंदोलनों का भी यह भवन एक महत्वपूर्ण साक्षी रहा है। इस प्रकार यह भवन अपने भीतर अनेक ऐतिहासिक स्मृतियों और घटनाओं को समेटे हुए है।
आज यही भवन एक नए स्वरूप में हमारे सामने जिला विरासत केंद्र, रीडिंग सेंटर और संग्रहालय (म्यूजियम) के रूप में प्रस्तुत है। यह स्थान केवल अतीत को संरक्षित करने का केंद्र नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
यदि हम इस संग्रहालय को देखें तो इसे मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला है यहाँ का प्रशासनिक इतिहास। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, लगभग 1914-15 के आसपास, सिमडेगा और आसपास के क्षेत्रों से कई लोग फ्रांस युद्ध लड़ने के लिए गए थे। उनमें से कुछ शहीद हो गए और कुछ वापस लौटे। उस समय ब्रिटिश सरकार द्वारा इस संबंध में कई आदेश और पत्राचार किए गए थे। बिहार एवं उड़ीसा सरकार के साथ हुए उस समय के पत्र, दस्तावेज और अभिलेख यहाँ संग्रहित कर प्रदर्शित किए गए हैं।
इसके अलावा यहाँ 1931 की जनगणना के मूल अभिलेख, लाह उत्पादन से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेज, उस समय की शिक्षा व्यवस्था के प्रमाण तथा सिमडेगा में शिक्षा के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी सुरक्षित रखी गई हैं। सिमडेगा आने के दौरान हलवाई नदी पर बना एक पुराना पुल दिखाई देता है, जिसे वर्ष 1912 में लंदन की एक प्रसिद्ध कंपनी ने बनाया था। उससे संबंधित अभिलेख भी यहाँ संरक्षित किए गए हैं।
इस भवन पर अंकित “बिल्डिंग नंबर-1” भी अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। जब सिमडेगा अनुमंडल की स्थापना हुई थी, तब यहाँ कुल छह प्रमुख भवन थे, जिनमें यह भवन सबसे महत्वपूर्ण था। इन सभी से जुड़े दस्तावेज और ऐतिहासिक अभिलेख भी यहाँ संग्रहित किए गए हैं।
संग्रहालय का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है सांस्कृतिक विरासत। यहाँ पारंपरिक वस्त्र, कपड़े बुनने की पद्धतियाँ, पुराने औजार, शिकार में उपयोग होने वाले उपकरण तथा विभिन्न पर्व-त्योहारों में प्रयुक्त वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही वे अस्त्र-शस्त्र भी यहाँ रखे गए हैं जिनका उपयोग कभी महाजनी प्रथा के विरोध में या ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुए विद्रोहों में किया गया था। आज ये वस्तुएँ अत्यंत दुर्लभ हो चुकी हैं, जिन्हें अब गाँवों में भी देखना मुश्किल हो गया है।
तीसरा हिस्सा है यहाँ का पलाश और सुदिनियर शॉप, जिसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ संचालित करेंगी। यही महिलाएँ इस संग्रहालय की देखरेख और संग्रहण के कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभाएँगी।
उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ. रॉबर्ट डी. पुटनम ने “सोशल कैपिटल” की अवधारणा दी है। अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Bowling Alone में उन्होंने बताया है कि सामाजिक पूँजी का अर्थ समाज में मौजूद विश्वास, सहयोग और सामाजिक नेटवर्क से है, जो लोगों को मिलकर काम करने और सामूहिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
इसी प्रकार समाज में एक “थर्ड प्लेस” की भी आवश्यकता होती है। पहला स्थान हमारा घर होता है, दूसरा हमारा कार्यस्थल, और तीसरा ऐसा स्थान जहाँ लोग सहज रूप से मिल सकें, संवाद कर सकें और अपने विचार साझा कर सकें। यह संग्रहालय और विरासत केंद्र उसी तीसरे स्थान की भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुएँ केवल पुरानी चीजें नहीं हैं, बल्कि हमारे समाज की जीवित स्मृतियाँ हैं। ये हमें याद दिलाती हैं कि इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और अनुभवों में भी बसता है।
उन्होंने विशेष संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल में स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है। झारखंड में संभवतः यह पहला पलाश ब्रांड का फूड ट्रक है, जिसे स्वयं सहायता समूह की दीदियाँ संचालित करेंगी। यहाँ झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ डोसा, चाय, कॉफी, आइसक्रीम और सैंडविच भी उपलब्ध रहेंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि संस्कृति कोई स्थिर वस्तु नहीं होती, बल्कि एक प्रवाह है जो समय के साथ बदलता रहता है। सिमडेगा की संस्कृति भी समय के साथ आगे बढ़ेगी, लेकिन अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलेगी। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने उपायुक्त महोदया, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह विरासत केंद्र आने वाले समय में युवाओं, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा।
विधायक भूषण बाड़ा ने बताया जिले के लिए गौरव का दिन
सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि आज का दिन जिले के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह भवन आजादी से पहले और उसके बाद भी लंबे समय तक प्रशासनिक कार्यालय के रूप में जनता की सेवा करता रहा है।
उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने इस भवन को संग्रहालय के रूप में संरक्षित करने की मांग उठाई थी। आज उसका साकार होना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय के माध्यम से आने वाली पीढ़ियाँ अपने क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति से परिचित हो सकेंगी।
कोलेबिरा विधायक श्री नमन विक्सल कोंनगाड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन सिमडेगा के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है। यह अवसर हमें अपने अतीत और उन घटनाओं को याद करने का मौका देता है, जिन्होंने इस क्षेत्र की पहचान और इतिहास को आकार दिया है। उन्होंने कहा कि पुराना अनुमंडल भवन कभी प्रशासन का प्रमुख केंद्र रहा है और अब इसे हेरिटेज सेंटर एवं संग्रहालय के रूप में विकसित कर जनता को समर्पित किया जाना सराहनीय पहल है।
उन्होंने कहा कि यहाँ प्रदर्शित अभिलेख, दस्तावेज़ और तस्वीरें हमें उस दौर की याद दिलाती हैं जब देश अंग्रेजी शासन के अधीन था। वर्ष 1915 से जुड़े दस्तावेज़ और अन्य ऐतिहासिक सामग्री हमारे अतीत को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि सिमडेगा आदिवासी बहुल जिला है, जहाँ लगभग 70 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समुदाय की है। उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। अंत में उन्होंने इस पहल के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
सिमडेगा की पहचान बनेगा विरासत केंद्र : विधायक सुदीप गुड़िया
तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि पुराने अनुमंडल भवन को हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित करना दूरदर्शी पहल है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं और विद्यार्थियों को अपने इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने विशेष रूप से यहाँ आयोजित पुस्तक मेला और पुस्तकालय की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत पुस्तकें होती हैं। उन्होंने जिले के नागरिकों से “पुस्तक दान अभियान” चलाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सिमडेगा शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है और छोटानागपुर क्षेत्र में सर्वाधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारी देने वाले जिलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुस्तक मेला बना आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान रांची से आए कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, वहीं स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। परिसर में पुस्तक मेला का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकाशकों ने अपनी पुस्तकों के स्टॉल लगाए।
इस दौरान सम्मानित श्री रनेंद्र कुमार, श्री अनूज लुगून एवं श्री संजय कच्छप वक्तागण ने अपने विचार प्रस्तुत की। सभी अतिथियों को जे०एस०एल०पी०एस० द्वारा गिफ्ट हैंपर, स्मृति चिन्ह एवं पौधा देखकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा पलाश दीदी द्वारा निर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए गए। भूमि संरक्षण विभाग द्वारा 07 महिला समूहों को ट्रैक्टर और 02 महिला समूहों को टाटा मैजिक वाहन भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा, खुटीं सांसद प्रतिनिधि श्री अमित डुंगडुंग, जिला परिषद अध्यक्ष, जिला परिषद उपाध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष, प्रशासनिक पदाधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि, सिमडेगा साहित्य सभा के सदस्य तथा विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



