सरायकेला-खरसावां में हाथियों का कहर, सड़क और गांवों में बढ़ी दहशत
चांडिल वन क्षेत्र ,के कुकडू प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले कई महीनों से हाथियों के

सरायकेला-खरसावां। जिले के कुकडू प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कई महीनों से हाथियों के झुंड के गांवों और मुख्य सड़कों पर आने से स्थानीय लोग परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि वन विभाग इस मामले में मौन है और कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। हाथियों का झुंड तिरुलडीह से सिरूम तक मुख्य सड़क पर अक्सर दिखाई देता है और कई बार घंटों सड़क पर खड़ा रहता है, जिससे आवाजाही भी बाधित हो जाती है। वहीं हाथी घरों और किसानों के खेतों में लगी फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चांडिल वन क्षेत्र के पदाधिकारी एंब डीएफओ द्वारा न तो फटाका और न ही मोबिल का प्रबंध कर रहा है, तथा एलिफेंट ड्राईव टिम भेजते है। जिससे हाथियों को भगाना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग समय रहते उचित कदम नहीं उठाता है, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
वन विभाग की लापरवाही से लोगों में गुस्सा। वहीं ग्रामीणों ने कहा, वन विभाग की लापरवाही से लोगों में गुस्सा है। हम मांग करते हैं कि जल्द से जल्द हाथियों को भगाने के लिए कदम उठाए जाएं। हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है और वन विभाग कुछ नहीं कर रहा है, ऐसे में हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार हर साल करोड़ों रुपये वन एवं पर्यावरण विभाग को देती है, इसके बावजूद वन्यजीव असुरक्षित हैं। आज स्थिति यह है कि जंगली जानवर जंगल छोड़कर गांवों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे मानव और हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।



